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ऐसे से तो रुहेलखण्ड से गायब हो जाएगा कमल!

बढ़ते जल प्रदूषण के कारण कमल, कुमुदनी सहित करीब सात सौ जलीय पौधों के अस्तित्व पर संकट के बादल छाए। 

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Sudhanshu Trivedi

Sep 15, 2016

lotus

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बरेली.
जल्द ही रुहेलखण्ड की सरजमी से कमल, कुमुदनी जैसे फूल गायब हो सकते हैं जिसका कारण है तालाबों पर हुए अवैध कब्जे। तालाबों पर हुए कब्जे और नदियों में बढ़ते प्रदूषण के कारण तमाम जलीय पौधों के अस्तित्व पर संकट छा गया है। एक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि कमल और कुमुदिनी समेत सैकड़ों फूलों की ऐसी प्रजातियां हैं जो ज़मीनी सतह से ग़ायब हो रही हैं। रूहेलखण्ड की जमीन फूलों की इन प्रजातियाें के लिए अब मुफीद नहीं रह गई हैं।


कॉलोनाइजर्स की करतूत से संकट

उत्तराखण्ड के तराई इलाके में बसे रूहेलखण्ड में फूलों की खेती खूब फल फूल रही थी। आबोहवा भी फूलों की खेती के लिए काफी मुफीद थी। लेकिन ज़मीन पर कंकरीट के जंगल खड़े करने की होड़ में कॉलोनाइज़र्स की नज़र टेढ़ी हो गई। बहते हुए पानी का रूख़ मोड़ दिया गया तो हरा भरा जंगल काटकर ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी कर दी गईं। नतीजा यह हुआ कि कमल, कुमुदिनी, ख़स, अजोला, खैर का पेड़, महुआ, अश्वगंधा, चिरौंजी समेत करीब सात सौ पौधों की प्रजातियाँ समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।


किताबों में ही दिखाई देगें फूल

बरेली कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर आलोक खरे ने बताया कि बरेली और उसके आस पास के जिलों में तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। किला, नकटिया और कैलाशा जैसी तमाम नदियां भी सिकुड़ गयी हैं और प्रदूषित हो गई हैं जिसके कारण अब कमल, कुमुदनी समेत तमाम जलीय पौधों का अस्तित्व संकट में है। आने वाले समय में ये फूल सिर्फ किताबों में ही दिखाई देंगे।

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