नए अध्यादेश पर अमल शुरू, यूपी के बरेली में दर्ज हुआ लव जिहाद का पहला केस, पुलिस के सामने आ रही यह परेशानी

धर्मांतरण पर कानून लागू होने के बाद यूपी के बरेली में लव जिहाद का पहला केस सामने आया है। आरोप है कि देवरनिया इलाके का रहने वाला छात्र उवैस अहमद उसके साथ पढ़ने वाली लड़की पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा है।

By: Karishma Lalwani

Published: 29 Nov 2020, 09:40 AM IST

बरेली. धर्मांतरण पर कानून लागू होने के बाद यूपी के बरेली में लव जिहाद का पहला केस सामने आया है। आरोप है कि देवरनिया इलाके का रहने वाला छात्र उवैस अहमद उसके साथ पढ़ने वाली लड़की पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा है। आरोपी ने छात्रा को कई तरह का लालच दिया है। कई बार लड़की व उसके परिवार द्वारा मना करने पर आरोपी छात्र ने जान से मारने की धमकी दी है। लव जिहाद के आरोप में देवरनिया पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी घर से फरार है। उसकी गिरफ्तारी की तलाश जारी है।

देवरनिया के गांव शरीफनगर गांव में ही रहने वाले रफीक अहमद का बेटा उवैस अहमद की पढ़ाई के समय से पीड़ित छात्रा से जान पहचान है। पीड़ित ने बताया कि वह अब उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा है। जबरन धर्म परिवर्तन कराना चाहता है। पीड़ित के मुताबिक उनके व परिवार द्वारा कई बार आरोपी से मना किया जा चुका है। फिर भी वह मानने को राजी नहीं है। लगातार दबाव बना रहा है। आरोपी उवैस ने धर्म परिवर्तन न करने पर जान से मारने की धमकी दी है। पीड़ित परिवार ने उसकी गिरफ्तारी की मांग की है।

सीसीटीएनएस में अपलोड नहीं है धारा

एसपी देहात डॉक्टर संसार सिंह के अनुसार, धर्म विरुद्ध परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा सीसीटीएनएस में अपलोड नहीं है। जिसकी वजह से सीसीटीएनएस में मुकदमा दर्ज होने पर धारा कंप्यूटर में नहीं दिख रही है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा को मुकदमे पर पेन के द्वारा लिखा गया है।

लव जिहाद पर सजा और जुर्माना

यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को धर्म परिवर्तन पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही यह कानून के रूप में अब लागू हो गया है। अब से शादी के लिए अगर लड़की का धर्म परिवर्तन किया गया तो न केवल ऐसी शादी अमान्य घोषित होगी बल्कि आरेपी को कम से कम 10 साल की सजा भी मिलेगी। नए अध्यादेश के मुताबिक बल पूर्वक, लालच देकर, धमकी देकर या किसी भी गैर कानूनी तरीके से धर्मांतरण कराकर शादी के लिए दबाव बनाया गया तो वह अपराध माना जाएगा।

  • अध्यादेश में छल-कपट से, प्रलोभन देकर, बल पूर्वक या विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के सामान्य मामले में कम से कम एक वर्ष व अधिकतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा कम से कम 15 हजार रुपये तक जुर्माना होगा।
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में कम से कम तीन वर्ष व अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माना होगा।
  • नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास तथा कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माना होगा।

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