
बरेली। बारादरी के ईसाइयों की पुलिया पर हुई गौरव गोस्वामी की सरेआम हत्या ने जिस दहशत की लकीर खींची थी, अब उसी पर पुलिस ने कड़ा प्रहार कर दिया है। कुख्यात गैंग के आठ आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट ठोंक दिया गया है। करीब पांच महीने तक चली पड़ताल के बाद आई यह कार्रवाई सीधे तौर पर संगठित अपराध के ढांचे पर वार मानी जा रही है।
11 सितंबर 2025 को दोपहर का वक्त था, भीड़भाड़ वाला इलाका और अचानक तड़तड़ाती गोलियों की आवाज से सब सहम गए। गोली लगते ही गौरव गोस्वामी लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। चीख-पुकार मची, दुकानों के शटर गिरे और इलाके में भगदड़ का माहौल बन गया। उसी दिन हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस की जांच ने साफ कर दिया कि यह कोई तात्कालिक झगड़ा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी।
जांच में सामने आया कि खुर्रम गौटिया निवासी निशांत सोनकर उर्फ बिहारीलाल इस गैंग का लीडर है। आरोप है कि उसी के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया गया। गैंग में चंदन मौर्य, अभय यादव, राजा उर्फ कपिल, समीर, शेखर, नैतिक सोनकर और अनस उर्फ मुलायम शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड खंगाले गए तो कई सदस्यों के खिलाफ पहले से मारपीट, धमकी, अवैध असलहा और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज मिले। गौरव हत्याकांड को उनके आपराधिक इतिहास का सबसे बड़ा अपराध माना जा रहा है। पुलिस ने पूरे गिरोह को डी-275/25 के रूप में पंजीकृत कर गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा कसा है। यह कदम महज एक मुकदमा नहीं, बल्कि गिरोह की जड़ें काटने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
गैंगस्टर एक्ट लगते ही पुलिस ने आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। जमीन, मकान, वाहन और बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है। अफसरों का संकेत साफ है कि यदि संपत्ति अवैध कमाई से अर्जित पाई गई तो कुर्की की कार्रवाई तय है। यानी अब सिर्फ जेल नहीं, बल्कि जायदाद पर भी सीधा वार होगा। एसएसपी अनुराग आर्य ने सख्त लहजे में कहा है कि शहर में संगठित अपराध बर्दाश्त नहीं होगा। भीड़ के बीच गोलियां चलाकर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कठोर से कठोर कदम उठाए जाएंगे। पुलिस की इस कार्रवाई को इलाके में बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
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Updated on:
26 Feb 2026 09:10 pm
Published on:
26 Feb 2026 09:09 pm
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