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मौलाना तौकीर : मजहब के उन्माद ने झुलसाया शहर, शरीयत पर सियासत, मंच से नसीहत, जेल में मजहबी नेता, ड्रग्स की गिरफ्त में लाडला

सिर पर मजहबी टोपी और दाढ़ी, अल्फाजों में आग उगलते नफरती शोले पिछले 25 सालों से बरेली में दहक रहे थे। स्थानीय प्रशासन की मजाल क्या मौलाना तौकीर अपने मंच से सीधे हुकूमत को चुनौती देता था, कि अगर हमारे नौ जवान सड़कों पर आ गये तो पूरे देश में बवाल खड़ा हो जायेगा।

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मौलाना तौकीर और उसका बेटा फरमान रजा

बरेली। सिर पर मजहबी टोपी और दाढ़ी, अल्फाजों में आग उगलते नफरती शोले पिछले 25 सालों से बरेली में दहक रहे थे। स्थानीय प्रशासन की मजाल क्या मौलाना तौकीर अपने मंच से सीधे हुकूमत को चुनौती देता था, कि अगर हमारे नौ जवान सड़कों पर आ गये तो पूरे देश में बवाल खड़ा हो जायेगा। धर्म, मज़हब, शरीयत, मुसलमानों के हक हकूक और सही राह के नाम पर सालों से मौलाना तौकीर रजा खान ने अपनी सियासत पर चार चांद लगाये। वह देश दुनिया के मुसलमान नौ जवानों को अच्छाई, शरीयत और मजहब का संदेश देते रहे, लेकिन खुद के बेटे फरमान को नफरत की इस सियासत से दूर रखा। उसे आस्ट्रेलिया में पढ़ा लिखाकर माडर्न एजुकेशन दिलवाई। बरेली में 26 सितंबर को हुये बवाल के बाद मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा का बेटा फरमान रजा खान अचानक उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब शाहजहांपुर के तिलहर में हुए एक सड़क हादसे ने ड्रग्स की परतें उधेड़ दीं।

यह वही आला हजरत परिवार है। जिसके एक मुखिया मौलाना तौकीर रजा पिछले 25 वर्षों में धर्म और मज़हब के नाम पर कई प्रदर्शन, रैलियां और उग्र आंदोलन खड़े कर चुके हैं। एनआईए से लेकर धारा 370, तीन तलाक, देश में कहीं कुछ हुआ मौलाना ने बरेली के अमन चैन को आग लगाने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। 2010 के दंगों में तोड़फोड़ हुई, शहर के कई हिस्सों में आग लगा दी गई। मौलाना को बरेली के तत्कालीन एसपी सिटी राकेश जौली ने गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन बसपा सरकार में वोटों की राजनीति में मौलाना को उसी पुलिस ने 169 की रिपोर्ट देकर जेल की सलाखों से बाहर निकाल दिया। इसके बाद से अब तक इसी दौर में मंचों से मौलाना जहरीले बोल बोलता, फिर नैतिकता और संयम की बात करता रहा। अब उन्ही के घर का चश्म ओ चराग जो आस्ट्रेलिया से एमबीए कर चुका है, हमेशा धार्मिक उन्माद से दूर रहा। वही नशे का आदी निकला। पिता जेल में हैं और बेटा हादसे के बहाने ड्रग्स केस में कानून के घेरे में। इसके अलावा उसके बैग से कुछ आपत्तिजनक टॅाय भी मिला है।

मंगलवार को शाहजहांपुर में हुए हादसे ने मौलाना के राजनीतिक कैरियर पर लगा दिया ग्रहण

शाहजहांपुर के तिलहर क्षेत्र में छह जनवरी मंगलवार शाम 7:30 बजे कछियानी खेड़ा हनुमान मंदिर के सामने खड़ी रोडवेज बस में पीछे से एक लग्जरी कार ने टक्कर मार दी थी। कार मौलाना तौकीर रजा खां का बेटा फरमान रजा खान चला रहा था। टक्कर के बाद पुलिस को शक हुआ तो डिक्की खोलने को कहा गया। फरमान ने पहले बहाने बनाए, लेकिन सख्ती के बाद डिक्की खोली। उसमें रखे बैग से पुलिस ने आधा ग्राम क्रिस्टल स्मैक (क्रिस्टल मेथ) और सिरिंज बरामद की। तिलहर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22ए में मुकदमा दर्ज किया। स्मैक की मात्रा कम होने के कारण उसमें सजा का प्रावधान कम है। इसकी वजह से बुधवार सुबह फरमान को जमानत पर छोड़ दिया गया। हालांकि फरमान के परिवार वालों का कहना था कि उनका बेटा ड्रग्स नहीं लेता है। पुलिस ने उनके बेटे को फंसाने के लिये जबरदस्ती उसका वीडियो बनवाया।

ड्रग्स के शिकंजे में मौलाना की मजहबी सियासत का वारिस

धर्म के नाम पर युवाओं को दिशा देने वाले मौलाना तौकीर रजा खां के घर से निकली यह कहानी सियासत की नैतिकता पर ही सवाल खड़े कर रही है। मौलाना जब मंच से जहरीले भाषण दे रहे थे तब उनके घर के अंदर ही जहर पैर पसार रहा था। क्या मज़हबी राजनीति का यही दोहरा चेहरा अब सार्वजनिक बहस बनेगा। मामला मौलाना के बेटे से जुड़ा है। बेहद नाजुक होने की वजह से लोग खुलकर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन पूछ रहे हैं। जब मज़हब के नाम पर मौलाना ने सड़कों पर उन्माद खड़ा किया, तब अपने बेटे को इससे दूर रखा, मौलाना चाहते थे कि उनका बेटा विदेश में तालीम हासिलकर एक अव्वल दर्जे का शहरी बने। इस वजह से उन्होंने उसे अपनी मजहबी सियासत से दूर रखा, लेकिन जब मौलाना 26 सितंबर को बरेली में हुये बवाल के बाद जेल चले गये तो बेटे को विदेश से बरेली आना पड़ा। मौलाना तौकीर का बेटा अब किस तरह से अपने वारिस होने का फर्ज अदा करता है, इस बारे में तो ज्यादा कुछ नहीं कहा सकता है, फिलहाल बाप जेल में और बेटा ड्रग्स केस में।

दिल्ली कनेक्शन: साकेत से आती थी स्मैक

पुलिस पूछताछ में फरमान ने कबूला कि वह दिल्ली के साकेत मेट्रो क्षेत्र में एक युवक से क्रिस्टल स्मैक खरीदता था। पहले फोन पर ऑर्डर, फिर दिल्ली जाकर डिलीवरी होती थी। अब पुलिस इसी नेटवर्क की तह तक जाने की तैयारी में है। एसएसपी शाहजहांपुर राजेश द्विवेदी ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिये पुलिस टीमों को लगाया गया है। पकड़ा गया ड्रग्स काफी महंगा है। इसकी कीमत करोड़ों में है। फरमान से मिले कुछ अहम सुराग और मोबाइल नंबरों से पुलिस अब सप्लाई लाइन, संपर्कों और संभावित सहयोगियों तक पहुंचने की तैयारी में है। जांच का दायरा बढ़ा तो कार्रवाई की आंच दूर तक जाएगी।

खतरनाक है क्रिस्टल ड्रग्स: जिस्म और ज़हन, दोनों का विनाश

क्रिस्टल मेथ (Crystal Meth) एक अत्यधिक व्यसनकारी सिंथेटिक ड्रग है, जोकि नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला करती है। कुछ ही समय में इसकी लत लगती है। इससे दिमागी संतुलन बिगड़ता है, आक्रामकता और भ्रम बढ़ता है। उत्तेजना को बढ़ाती है। युवा पीढ़ी सेक्स के लिये इसका जमकर इस्तेमाल कर रही है। दिल, किडनी, लिवर को गंभीर नुकसान है। लंबे इस्तेमाल से मानसिक रोग, अवसाद और आत्मघाती प्रवृत्ति बढ़ने लगती है।