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महिला आरक्षण बिल गिरते ही बरेली में सियासी बवाल, मुस्लिम महिलाओं का फूटा गुस्सा, विपक्ष के पुतले फूंके

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद शहर में सियासी माहौल गरमा गया। रविवार को दामोदर स्वरूप पार्क में मुस्लिम महिलाओं ने विपक्षी दलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का गुस्सा साफ तौर पर नजर आया।

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बरेली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद शहर में सियासी माहौल गरमा गया। रविवार को दामोदर स्वरूप पार्क में मुस्लिम महिलाओं ने विपक्षी दलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का गुस्सा साफ तौर पर नजर आया।

तीन तलाक पीड़िता और आला हजरत वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में महिलाएं पार्क में एकत्रित हुईं। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए अपने आक्रोश को खुलकर व्यक्त किया। महिलाओं का हक छीना नहीं जाएगा और विपक्ष जवाब दो जैसे नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे।

पुतला दहन कर जताया आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुतले फूंके। इस दौरान माहौल काफी गर्म रहा। महिलाओं का आरोप था कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल को गिराकर खासकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक हिस्सेदारी देने का बड़ा माध्यम बन सकता था। निदा खान ने कहा कि महिला आरक्षण बिल देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे रोककर यह साबित कर दिया कि वे महिलाओं के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी और वे पीछे नहीं हटेंगी।

पीएम मोदी के समर्थन में उतरीं महिलाएं

निदा खान ने साफ तौर पर कहा कि इस मुद्दे पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इस दौरान कई अन्य महिलाओं ने भी सरकार के समर्थन में अपनी बात रखी। बरेली में हुए इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत और तेज हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर और प्रदर्शन होने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह विरोध अब बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता नजर आ रहा है।

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