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मोबाइल-गेमिंग की गिरफ्त में ‘जेन-जी’ बढ़ रहीं दिमागी बीमारियां, मेंटल हॉस्पिटल में 30 प्रतिशत युवा, बचपन और शरीर दोनों पर संकट

स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेमिंग और नशे की लत ने नई पीढ़ी ‘जेन-जी’ को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मेंटल हॉस्पिटल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 30 प्रतिशत युवा शामिल हैं।

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बरेली। स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेमिंग और नशे की लत ने नई पीढ़ी ‘जेन-जी’ को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मेंटल हॉस्पिटल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 30 प्रतिशत युवा शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक विकास पर भी सीधा असर डाल रहा है।

गेमिंग में उलझा यूथ, आउटडोर खेलों से दूरी

आज का युवा मैदान से दूर और मोबाइल स्क्रीन में कैद हो गया है। क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी जैसे आउटडोर गेम्स की जगह अब ऑनलाइन गेमिंग ने ले ली है। इसका असर यह हो रहा है कि युवाओं का शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है और शरीर कमजोर होता जा रहा है।

बात-बात पर गुस्सा, झुंझलाहट बन रही नई पहचान

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम और गेमिंग के कारण युवाओं में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और आक्रामकता तेजी से बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करना, खुद पर नियंत्रण खोना और सामाजिक व्यवहार में बदलाव अब आम हो गया है।

मेंटल हॉस्पिटल की ओपीडी में बढ़ती भीड़, 30% जेन-जी

जांच में सामने आया है कि मेंटल हॉस्पिटल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 30 प्रतिशत 16 से 25 वर्ष के युवा हैं। डॉक्टर आलोक शुक्ला के मुताबिक, कोविड के बाद यह संख्या तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में आने वालों में 50 प्रतिशत महिलाएं और करीब 10 प्रतिशत बच्चे भी शामिल हैं।

मोबाइल और सोशल मीडिया बना बड़ा कारण

डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहने की चाह, दूसरों से तुलना और फेमस होने का दबाव युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है। ज्यादा स्क्रीन टाइम से नींद की समस्या, तनाव और डिप्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं।

ड्रग्स और नशे की गिरफ्त में फंस रहा युवा

मेंटल हॉस्पिटल में आने वाले कई मामलों में ड्रग एडिक्शन बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, करीब 30 प्रतिशत मामलों में नशे की लत जुड़ी होती है। कई युवा घर और परिवार होते हुए भी सड़कों पर भटकते नजर आते हैं।

शरीर और दिमाग दोनों पर डबल अटैक

विशेषज्ञों का कहना है कि गैजेट्स और गेमिंग का असर सिर्फ दिमाग पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी पड़ रहा है। फिजिकल एक्टिविटी कम होने से फिटनेस गिर रही है, जबकि मानसिक तनाव और ओवरथिंकिंग से दिमागी बीमारियां बढ़ रही हैं।

डि-एडिक्शन सेंटर बनेगा उम्मीद की किरण

मेंटल हॉस्पिटल में एम्स की मदद से डि-एडिक्शन सेंटर तैयार किया गया है, जो जल्द शुरू होगा। इससे नशे की लत से जूझ रहे युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

डॉक्टरों की सलाह—स्क्रीन टाइम कम करें, जिंदगी को बैलेंस करें

विशेषज्ञों ने युवाओं को सलाह दी है कि मोबाइल और गेमिंग से दूरी बनाएं, आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाएं, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं और तनाव को सही तरीके से मैनेज करें। वरना आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।