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दौड़ लगाकर थानों की चेकिंग करने वाले मुनिराज बने बरेली के पुलिस कप्तान

कलानिधि नैथानी ने सिर्फ 67 दिन में ही लोगों का दिल जीत लिया, कई अभियान चलाए तो वरिष्ठ अफसरों की नजर में आए

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kalanidhi naithani

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बरेली। लखनऊ यूनिवर्सिटी में हुए बवाल के बाद निशाने पर आए लखनऊ के एसएसपी को हटा दिया गया है उनके स्थान पर 2010 बैच के आईपीएस अफसर कलानिधि नैथानी को लखनऊ का एसएसपी बनाया गया है। कलानिधि नैथानी इसके पहले बरेली में एसएसपी के पद पर तैनात था। बरेली में कम समय में ही नैथानी ने यहां के लोगों का दिल जीत लिया था। मुनिराज को बरेली का नया एसएसपी बनाया गया है। वे दौड़ लगाकर थानों की चेकिंग करने के लिए मशहूर हैं।

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कई मैराथन में मेडल भी जीते हैं मुनिराज ने

कलानिधि नैथानी की जगह पर मुनिराज को बरेली का एसएसपी बनाया गया है। मुनिराज 2009 के आईपीएस अफसर हैं। मुनिराज पीलीभीत, बुलन्दशहर की कप्तानी कर चुके हैं। वर्तमान में वे एसपी ट्रेनिंग और सिक्योरिटी थे। मुनिराज साइकिल और पैदल दौड़ कर थानों और चौकियों का निरीक्षण करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई मैराथन में मेडल भी जीते हैं।

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67 दिन में ही दिल जीता

30 अप्रैल 2018 को कलानिधि नैथानी ने बरेली जिले की कप्तानी संभाली थी। महज 67 दिन ही बरेली में तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने कई अभियान चलाए और 14 नए सेल का गठन किया। उनके कार्यकाल में 250 से ज्यादा पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया। उनके द्वारा अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान का असर यह रहा कि एक-एक बदमाश की कुंडली पुलिस के पास पहुँच गई और तमाम बदमाश सलाखों के पीछे भेजे गए। उनकी इसी कार्यशैली का उन्हें इनाम मिला और वो सीनियर अफसरों की नजरों में आए। जिसके बाद सीनियर अफसरों को नजरंदाज करते हुए उन्हें राजधानी की कप्तानी सौंपी गई है।

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ये किए काम

कलानिधि नैथानी ने अपनी तैनाती के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ऑपरेशन ब्राउन चलवाया जिसका असर यह हुआ कि इस काम में जुड़े तमाम लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे गए। लाखों रुपये की अवैध शराब और मादक पदार्थ जब्त किए गए। उन्होंने परिवार को जोड़ने के लिए चलने वाले परामर्श केंद्र को हर तहसील में लगवाना शुरू किया, जिससे लोगों को मुख्यालय नहीं आना पड़ता था। उन्होंने उन रईसजादों पर भी लगाम लगाई जो बुलेट या अन्य महंगी गाड़ियों से सड़क पर रफ ड्राइविंग करते थे। कलानिधि नैथानी ने जहां लापरवाह पुलिस वालों पर लगाम लगाई, वहीं उनके वेलफेयर के लिए प्रकोष्ठ का गठन किया। पुलिसकर्मियों के लिए हेल्पलाइन नम्बर भी शुरू किया।

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आए अफसरों की नजर में

कलानिधि नैथानी को बरेली का एसएसपी बनाए जाने के साथ ही कानाफूसी शुरू हो गई थी कि जूनियर अफसर को कमिश्नरी का जिला कैसे दे दिया गया। उनकी कार्यशैली ने बता दिया कि वो किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम हैं। ज्यादातर घटनाओं में 24 घण्टे के अंदर आरोपियों की गिरफ्तारी कराई तो मुकदमा दर्ज कराने में कोई कंजूसी नही की पुलिसिंग में नए नए प्रयोग किए। उनके समय मे पुलिस सड़कों पर दिखी। यही कारण है कि वो अफसरों की नजर में आए और लखनऊ के एसएसपी बनाए गए।

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