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यहां निकाय चुनाव में हर सीट पर अहम भूमिका निभाएंगे मुस्लिम

मुस्लिम बाहुल्य जिला होने की वजह से हर सीट पर मुस्लिम फेक्टर काम करेगा।  

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बरेली

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Amit Sharma

Oct 30, 2017

muslim

बरेली। नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। बरेली में अंतिम चरण में 29 नवंबर को मतदान होगा। जिसके लिए अब राजनैतिक दलों ने चुनावों की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। बरेली में नगर निगम के अलावा चार नगर पालिका परिषद और 15 नगर पंचायतों में चुनावी घमासान होगा। यदि बात करें मुस्लिम मतदाताओं की तो मुस्लिम बाहुल्य जिला होने की वजह से हर सीट पर मुस्लिम फेक्टर काम करेगा। यहां पर हर सीट पर मुस्लिम वोटरों की तादात अच्छी खासी है जिसके कारण पिछले नगर निकाय के चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों ने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में बड़े पैमाने पर जीत दर्ज की थी।


बरेली नगर निगम में निर्णायक संख्या

बात करें बरेली नगर निगम की तो नगर निगम में कुल मतदाताओं की संख्या 775658 है जिसमें पुरुष मतदाता 419079 और महिला मतदाता 356579 हैं। अगर बात करें मुस्लिम मतदाताओं की तो नगर निगम क्षेत्र में ही तीन लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। पिछले चुनाव में मुस्लिम वोट सपा समर्थित डॉक्टर आईएस तोमर को मिला और उन्होंने मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाया। कुछ यही हाल नगर निगम के वार्डों का भी रहा नगर निगम के 70 वार्ड में 26 मुस्लिम पार्षद भी जीते थे जिसमें 24 सपा समर्थित थे।


नगर पालिका और नगर पंचायतों में अच्छी खासी संख्या

अगर बात करें नगर पालिका और नगर पंचायत की तो यहां भी पिछले चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों बड़े पैमाने पर जीत मिली थी। चार नगर पालिकाओं में बहेड़ी, आंवला और नवाबगंज नगर पालिका में मुस्लिम प्रत्याशी को जीत मिली थी। जिसमें नवाबगंज की शहला ताहिर सपा के समर्थन से चुनाव जीती थीं जबकि आंवला के आबिद अली आईएमसी से चुनाव जीते थे और बाद में सपा में शामिल हो गए जिले की 15 नगर पंचायतों में से 11 नगर पंचायतों में मुस्लिम प्रत्याशी ही चेयरमैन बना था। जिसमें फरीदपुर, रिछा, देवरनिया, धौराटांडा , शाही, शीशगढ़, फतेहगंज पश्चिमी, फतेहगंज पूर्वी, सेंथल, ठिरिया निजावत खान और विशारतगंज में मुस्लिम प्रत्याशी चेयरमैन चुने गए थे। इनमें से ज्यादातर सपा समर्थित हैं। इसके अलावा नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्ड में भी काफी तादात में मुस्लिम सभासद चुने गए।


पार्टियों की नजर मुस्लिमों पर

2017 में हुए विधानसभा के चुनाव में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन किया था। बावजूद इसके बीजेपी ने जिले की सभी नौ विधनसभा सीट जीती थीं। हालांकि शहर और कैंट में कांग्रेस प्रत्याशी को इसका फायदा भी मिला और कांग्रेस ने इन दोनों सीटों पर अच्छे वोट प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी। इस बार के चुनाव में भी पार्टियों की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर है कि मुस्लिम मतदाताओं का रुख किस तरफ होगा।