
Ramadan 2020: 50 रुपए सदका ए फित्र अदा करें मुसलमान: अहसन मियां
बरेली। रमजान का पवित्र महीना चल रहा है ऐसे में रमजान को लेकर विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत से मुसलमानों के लिए ख़ास अपील जारी की गई है। दरगाह के सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा खान "अहसन मियां" ने गरीबों की मदद करने की अपील की है। दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने जानकारी देते हुए बताया कि दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन अहसन मियां ने मुल्क भर के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि मुल्क में तीसरा लॉकडाउन शुरू हो चुका है।लोगों के कारोबार पूरी तरह से बंद पड़े हैं। देश आर्थिक संकट से गुज़र रहा है, पिछले लगभग 44 दिन से लॉकडाउन जारी है।रमज़ान में लोगो को इफ्तार व सहरी की किल्लत बनी हुई है। अमूमन लोग सदका ए फित्र ईद से पहले अदा करते थे। लेकिन इस मुश्किल वक़्त में मुसलमान जल्द से जल्द सदका ए फित्र और ज़कात की रकम गरीबों, मज़दूरों, बेवाओं, यतीमों तक पहुँचा दें।
50 रूपये अदा करें
उन्होंने कहा कि एक शख्स पर 2 किलो 45 ग्राम गेहूं अदा करना वाजिब है या गेहूं की आज के बाज़ार (बरेली में अच्छी क्वालिटी का एक किलो गेहूं का रेट लगभग 22 से 23 रुपए है ) रेट की कीमत जो लगभग 45 रुपए बन रही है, बेहतर रहेगा कि एक आदमी के पचास रुपए अदा कर दिए जाए। बढ़ा कर जितना चाहे दे सकते हैं। ये कीमत बरेली के लिए मुक़र्रर की गई। अन्य शहरों के लोग अपने यहाँ गेहूं का रेट मालूम कर अदा करें। साथ ही धयान रखे कि सदका ए फित्र की कीमत बढ़ा कर तो दे सकते है लेकिन कम न हो अगर कम कीमत अदा की तो सदका ए फित्र अदा न होगा।
इसका रखें ध्यान
हदीस में आया है कि अल्लाह उसके सदके को कुबूल नही करता, जिसके रिश्तेदार मोहताज़ हो और वो दूसरों पर खर्च करे। अफ़ज़ल है कि ज़कात पहले अपने अज़ीज़ ज़रूरतमंदों को दें। ज़कात व फ़ित्रा की रकम भाई-बहन, चाचा, मामू, खाला, फूफी, सास-ससुर, बहु और दामाद को भी दी जा सकती है बशर्ते ये लोग शरई मालदार न हो। माँ-बाप, औलाद, दादा-दादी, नाना-नानी, पोता-पोती, नवासा-नवासी को ये रकम नही दी जा सकती। यतीम खानों और मदरसों में भी ये रकम दे सकते है।
Published on:
04 May 2020 03:16 pm
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