16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस्लाम से खारिज करने पर निदा ने महिला आयोग से की शिकायत

निदा ने राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाए है कि उनको इस्लाम से खारिज करने का फतवा शौहर जीशान रज़ा के इशारे पर जारी किया गया है।

2 min read
Google source verification
nida khan

nida khan

बरेली। तलाक पीड़ित महिलाओं की लड़ाई लड़ने वाली निदा खान को इस्लाम से खारिज करने का मामला अब राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया है। प्रदेश का अल्पसंख्यक आयोग पहले ही इस मामले की जाँच कर रहा है और आयोग की टीम बरेली आ कर दोनों पक्षों के बयान भी दर्ज कर चुकी है। निदा खान ने अब इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग में दर्ज कराई है। निदा ने राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाए है कि उनको इस्लाम से खारिज करने का फतवा शौहर जीशान रज़ा के इशारे पर जारी किया गया है।

निदा ने की कार्रवाई की मांग

निदा ने महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि उनके खिलाफ फतवा जारी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। निदा का आरोप है कि ये फतवा उनके पति के इशारे पर जारी किया गया और उन्हें इस्लाम से खारिज कर दिया गया। निदा का कहना है कि फतवा जारी कर उनका हुक्का पानी बंद कर दिया गया है इतना ही नहीं उनके बीमार होने पर कोई उन्हें दवा भी नहीं दे सकता और मरने पर कब्रिस्तान में दफन भी नहीं करने दिया जाएगा। निदा का कहना है कि उनको अलग थलग करने के लिए फतवा जारी किया गया है और इस फतवे फतवे का प्रभाव उनकी जिंदगी पर पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये फतवा उनके मौलिक अधिकारों का हनन है इस लिए इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस्लाम से किया था खारिज

तलाक पीड़ित महिलाओं के हक की आवाज बनी निदा खान के खिलाफ 16 जुलाई को दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से फतवा जारी किया गया था। शहर इमाम खुर्शीद आलम ने दारुल इफ्ता से फतवा माँगा था। जिसमे बताया गया था कि जो अल्लाह, खुदा के बनाये कानून की मुखालफत करता है वो इस्लाम से खारिज हो जाता है क्योंकि निदा खान शरीयत की मुखालफत कर रही है जिस वजह से उनके खिलाफ फतवा जारी हुआ है। शहर इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने दरगाह आला हजरत पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि निदा का हुक्का पानी बन्द कर दिया गया है और निदा की मदद करने वाले, उससे मिलने जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज किया जाएगा। निदा अगर बीमार हो जाती है तो उसको दवा भी नही दी जाएगी, निदा की मौत पर जनाजे की नवाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नही निदा के मरने पर उसे कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गई है। ये फतवा जारी होने के बाद निदा खान की चोटी काटने और उसे पत्थर मार कर देश से भगाने का भी एलान हुआ था।