कहलों ने पत्रकारों को बताया कि 25साल बाद इस मुकदमे में पुलिसकर्मियों को तो दोषी ठहरा दिया गया, लेकिन तत्कालीन एसपी आरडी त्रिपाठी, डीआईजी और आईजी को निर्दोष करार दिया गया है, जो उचित नहीं है। उनका कहना है कि जिले में पुलिस कप्तान की मर्जी के बगैर कोई भी अधीनस्थ अधिकारी या कर्मचारी इतनी जुर्रत नहीं कर सकता। एसपी, आईजी, डीआईजी से आदेश मिलने के बाद ही 11 निर्दोषों का फर्जी एनकाउंटर संभव हुआ होगा। सीबीआई कोर्ट ने आदेश में चूक की है।