
बरेली। रेलवे स्टेशन जैसा संवेदनशील इलाका जहां सुरक्षा चाक-चौबंद होनी चाहिए, वहीं मंगलवार देर रात पुलिसकर्मियों की आपसी भिड़ंत ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। जीआरपी थाने में विदाई समारोह के दौरान कहासुनी इतनी बढ़ी कि हाथापाई और गोलीबारी तक जा पहुंची। अचानक हुई तड़तड़ाहट से स्टेशन पर अफरातफरी मच गई और यात्री दहशत में आ गए।
थाने के अंदर विवाद के बीच पिस्तौल छीनी जाने की कोशिश हुई और ट्रिगर दबते ही गोलियां चल गईं। इस दौरान इंस्पेक्टर परवेज अली की नाक और सिपाही मोनू के कान पर गोली लगी। आनन-फानन दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
थाने के भीतर हुई इस शर्मनाक घटना ने विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी जीआरपी लखनऊ रोहित मिश्रा ने इंस्पेक्टर परवेज अली समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
हैरत की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना की भनक तक बड़े अफसरों को दो दिन तक नहीं लगी। थाने के पुलिसकर्मी पूरे मामले को दबाए रहे। लेकिन जब गोलीकांड हुआ, उस वक्त हवालात में तीन मुल्जिम बंद थे। पुलिसकर्मियों ने घबराहट में उन्हें छोड़ दिया। बाहर आकर मुल्जिमों ने थाने के भीतर हुए गोलीकांड की पूरी कहानी खोल दी। इसी के बाद मामला अफसरों तक पहुंचा।
फायरिंग की आवाज स्टेशन परिसर तक पहुंचते ही यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोगों का कहना था कि जब थाने के भीतर ही पुलिसवाले हथियारों से भिड़ रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा किस पर छोड़ी जाएगी।वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि अनुशासनहीनता और लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों पर विभागीय जांच के बाद कड़ी कार्रवाई तय है।
एसपी जीआरपी लखनऊ रोहित मिश्रा ने बताया कि जीआरपी थाने में हुई फायरिंग गंभीर लापरवाही है। इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। हथियारों के साथ ऐसी अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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Updated on:
04 Sept 2025 06:11 pm
Published on:
04 Sept 2025 05:35 pm
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