
बैठक में मौजूद मंत्री और अन्य जनप्रतिनिध
बरेली। शहर में अंधाधुंध बिजली कटौती और लोकल फाल्ट ने 24 घंटे आपूर्ति के दावों की हवा निकाल दी। बिजली व्यवस्था पर आखिरकार जनता का उबाल सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया। रातभर अंधेरे, उमस और बेहाल सप्लाई से तिलमिलाए जनप्रतिनिधियों ने शनिवार को सर्किट हाउस में बिजली विभाग के अफसरों को ऐसा घेरा कि पूरा माहौल गर्म हो गया। सवालों की बौछार, भ्रष्टाचार के आरोप, फोन न उठाने की शिकायतें और बहानों की बरसात के बीच बैठक कई बार तल्ख हो गई।
तीन दिन पहले वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने बिजली व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए पत्र लिखा था। इसके बाद मध्यांचल की एमडी रीया केजरीवाल ने चीफ इंजीनियर टेक्निकल मनीष गुप्ता को बरेली भेजा। सर्किट हाउस में हुई बैठक में डीएम अविनाश सिंह, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली के चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार और कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने अफसरों की कार्यशैली पर जमकर नाराजगी जताई।
बैठक में भाजपा से कैंट विधायक संजीव अग्रवाल का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब लगातार ट्रिपिंग, घंटों की कटौती और शिकायतों के बावजूद हालात न सुधरने की बात सामने आई। आरोप लगाया गया कि बिजलीघरों के फोन या तो बंद रहते हैं या कोई उठाता नहीं। जनता पूरी रात जागकर काट रही है, लेकिन विभाग कागजों में सप्लाई दुरुस्त दिखाने में जुटा है। दुर्गानगर, सैनिक कॉलोनी, किला, बिहारीपुर, सुभाषनगर, नेकपुर और मढ़ीनाथ समेत कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि इनवर्टर जवाब दे चुके हैं। पानी की टंकियां सूख रही हैं और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।
बैठक के दौरान एक पार्षद ने बिजली विभाग को सीधे कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल दाग दिए कि आखिर करोड़ों की योजनाओं के बाद भी हर गर्मी में शहर अंधेरे में क्यों डूब जाता है। माहौल इतना गरमा गया कि चीफ इंजीनियर को कहना पड़ा— “मैं विभाग का चीफ इंजीनियर हूं, मुझसे तरीके से बात करिए।” लेकिन यह जवाब भी जनप्रतिनिधियों के गुस्से को शांत नहीं कर सका। उल्टा सवाल और तेज हो गए कि जब जनता रातभर तड़पती है तो विभागीय जिम्मेदारी आखिर कहां गायब हो जाती है।
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि विभाग की प्राथमिकता अब व्यवस्था सुधार नहीं, सिर्फ बिल वसूली बनकर रह गई है। शहर में ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, फॉल्ट घंटों नहीं बन रहे और शिकायतों का निस्तारण भगवान भरोसे चल रहा है। जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देगा। लगातार कटौती ने अब लोगों का सिर्फ चैन नहीं छीना, बल्कि सिस्टम पर भरोसा भी तोड़ना शुरू कर दिया है।
बैठक में इस बात पर भी सवाल उठा कि आखिर हर साल गर्मी आते ही बिजली व्यवस्था क्यों ध्वस्त हो जाती है। करोड़ों रुपये के बजट, सुधार योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि शहर की बिजली व्यवस्था वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। सर्किट हाउस में चली इस गरमागरम बैठक ने साफ कर दिया कि अब बिजली संकट सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जनता और सिस्टम के बीच भरोसे की लड़ाई बन चुका है।
Updated on:
23 May 2026 10:24 pm
Published on:
23 May 2026 10:24 pm
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