
यहाँ होली के अवसर पर भी होती है रामलीला, जानिए रोचक बातें
बरेली। वैसे तो देश में रामलीला का मंचन विजय दशमी के पहले किया जाता है लेकिन बरेली में रामलीला का मंचन होली के अवसर पर भी किया जाता है। होली के अवसर पर बड़ी बमनपुरी मोहल्ले में होने वाली ये रामलीला होली पर होने वाली एक मात्र रामलीला है और ये परम्परा पिछले 160 वर्षों से लगातार चली आ रही है। होली वाली रामलीला को यूनेस्को ने 2015 में विश्व धरोहर घोषित किया था तब से उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने रामलीला के संरक्षण के लिए एक लाख रूपये कमेटी को देना शुरू कर दिया हैं। बुजर्ग बताते हैं कि रावण वध की तिथि चैत्र की एकादशी बताई गई है। इस लिए यहाँ फाल्गुन माह में रामलीला शुरू होकर चैत्र में समाप्त होती है।
अलग अलग जगहों पर होता है मंचन
इस रामलीला की खास बात यह है कि इस रामलीला के अलग अलग प्रसंगों का मंचन भी अलग अलग मोहल्लों में होता है। शबरी लीला चटोरी गली में, अगस्त्य मुनि लीला अगस्त्य मुनि आश्रम में, केवट संवाद लीला साहूकारा में, मेघनाथ यज्ञ वमनपुरी चौराहा पर, लंकादहन मलूकपुर चौराहा पर, अंगद-रावण संवाद शाहजी की बगिया के सामने होता है। अन्य सभी प्रसंगों का मंचन नृसिंह मंदिर गेट पर होता है।
राम बारात होती है आकर्षण का केंद्र
रामलीला के तहत होली के एक दिन पहले भव्य राम बारात का आयोजन किया जाता है। राम बारात बड़ी बमनपुरी से शुरू होती है और शहर के अलग अलग इलाकों से गुजरती है। राम बारात में हजारों की तादात में लोग शामिल होते हैं। राम बारात में होरियारों की टोलियां भी शामिल रहती हैं जो लोगों पर रंग बरसाते हुए चलती हैं।
साम्प्रदायिक सौहार्द की है मिसाल
होली पर होने वाली ये रामलीला हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी मानी जाती हैं।1861 में इस रामलीला की शुरुआत हुई थी। लेकिन बीच में अंग्रेजों ने इस रामलीला के मंचन पर रोक लगाने की कोशिश की थी तो धर्मगुरु आला हजरत ने अदालत में पैरवी कर रामलीला को दोबारा शुरू कराया था तब से ये रामलीला आपसी भाई चारे की मिसाल बनी हुई है। इस रामलीला के तहत होली के एक दिन पहले शहर में विशाल रामबारात निकलती है। जिसका जगह जगह पर मुस्लिमों द्वारा स्वागत किया जाता है।
Published on:
05 Mar 2020 12:09 pm
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