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बरेली। गरीबों की बेटियों की शादी में कोई दिक्कत न हो इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत की है। इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार की तरफ से बजट भी जारी कर दिया गया है, लेकिन अफसरों की लापरवाही से योजना का लाभ असली लोगों तक नही पहुंच पा रहा है। टारगेट पूरा करने के लिए सरकारी मशीनरी इस योजना में पलीता लगाने का काम कर रही है। एक बार फिर आंवला तहसील में इस योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां पर आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 20 जोड़ों की शादी कराई गई जिसमें ज्यादातर जोड़े पहले से शादीशुदा थे या फिर उनकी अभी शादी होनी है। इस सामूहिक विवाह समारोह में प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री और आंवला के विधायक धर्मपाल सिंह भी पहुंचे थे। इस फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बाद एसडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
विवाह के नाम पर केवल रस्म अदायगी
आंवला नगर पालिका में 20 जोड़ों का सामूहिक विवाह करवाया गया। इसमे हिन्दू और मुश्लिम दोनो ही समुदाय के जोड़े शामिल हुए। खास बात ये रही कि जोड़ों में अधिकतर पहले से शादीशुदा थे और कई जोड़ों की अभी शादी होनी है। सामूहिक विवाह के नाम पर केवल रस्म अदायगी हुई। न किसी के फेरे लगे, न ही मांग भरी गई। केवल जयमाल पहना कर विवाह की रस्म अदा कर दी गई। वहीं मुस्लिम जोड़ों को निकाह भी नहीं पढ़वाया गया।
जांच हुई शुरू
मुस्लिम धर्मगुरु ने ऐसे विवाह को इस्लाम के खिलाफ बताया है। वहीं जब इस मामले की जानकारी आंवला के एसडीएम विशुराजा को हुई तो उन्होंने जांच का भरोसा दिलाया।
पहले भी हुआ मजाक
आंवला में इस योजना में गड़बड़ झाले का ये कोई पहला मामला नहीं है बल्कि इसके पहले फरवरी में भी इस योजना को अफसरों ने मजाक बनाया था। इसके बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है।
Updated on:
26 Jun 2018 01:26 pm
Published on:
26 Jun 2018 01:26 pm
