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रिंग रोड पर फूटा किसानों का गुस्सा ट्रैक्टरों से जाम, पानी भरकर रोका काम, मुआवजा नहीं तो एक इंच भी नहीं बढ़ेगी मशीन

रिंग रोड परियोजना पर किसानों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। सीबीगंज के पस्तोर गांव में किसानों ने निर्माण स्थल को रणभूमि बना दिया।

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बरेली। रिंग रोड परियोजना पर किसानों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। सीबीगंज के पस्तोर गांव में किसानों ने निर्माण स्थल को रणभूमि बना दिया।ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर रास्ता जाम, इंजन चलाकर सड़क पर पानी भर दिया और साफ ऐलान कर दिया कि “जब तक खाते में पूरा मुआवजा नहीं, तब तक एक इंच भी काम नहीं।

दिल्ली-बदायूं-लखनऊ रोड को जोड़ने वाले 29 किमी के इस मेगा प्रोजेक्ट पर किसानों ने ब्रेक लगा दिया। निर्माण स्थल पर दर्जनों ट्रैक्टर खड़े कर दिए गए, जिससे मशीनरी पूरी तरह ठप हो गई। किसानों ने सड़क पर पानी भरकर काम को असंभव बना दिया। मौके पर हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि निर्माण एजेंसियों को पीछे हटना पड़ा।

20 प्रतिशत को पैसा, 80 प्रतिशत दफ्तरों में भटक रहे

धरने की अगुवाई कर रहे किसान नेता ज्ञानप्रकाश लोधी ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि रोड डालने की जल्दी है, लेकिन मुआवजा देने में सुस्ती कर रहे हैं।
किसान अंगन लाल ने बताया कि चार बीघा जमीन चली गई, लेकिन एक रुपया तक नहीं मिला। वहीं केदार और रेवाराम का आरोप है कि छह महीने से सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। किसानों के मुताबिक करीब 20 गांव प्रभावित हैं, लेकिन सिर्फ 20 प्रतिशतको ही भुगतान हुआ है।

पैसा नहीं तो आंदोलन उग्र होगा

किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो यह धरना उग्र आंदोलन में बदल जाएगा। भाजपा नेता एडवोकेट अनिल कुमार भी मौके पर पहुंचे और किसानों का समर्थन करते हुए अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर भुगतान जल्द कराने की मांग की।

NHAI आठ गांवों पर कब्जे की तैयारी

दूसरी तरफ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी सख्त रुख अपनाया है। परियोजना निदेशक ने एसएलएओ को पत्र भेजकर आठ गांवों मेंचौबारी मुस्तकिल, बारी नगला, उमरसिया, लखौरा, दुवारी, पालपुर कमालपुर, धारूपुर ठाकुरान और सराय तल्खी की जमीन पर जल्द कब्जा दिलाने को कहा है।
बताया गया कि भूमि न मिलने से ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है और प्रोजेक्ट पहले ही तय समय सीमा (दिसंबर 2025) से पीछे चल रहा है।

ज्यादा जमीन पर भी कब्जे की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों पर अधिग्रहण से ज्यादा जमीन पर मिट्टी डालकर कब्जा करने की कोशिश हो रही है, जिससे किसानों का गुस्सा और भड़क गया है। किसानों का कहना है कि यह सीधा-सीधा अन्याय है और जब तक पूरी पारदर्शिता और भुगतान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।