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16 करोड़ के कर्ज में डूबी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, नगर निगम ने सीज कर दिए बैंक खाते, जाने क्या होगा

नगर निगम को हल्के में लेना अब भारी पड़ने लगा है। शहरवासियों के साथ-साथ सरकारी महकमे भी अगर टैक्स नहीं देंगे तो कार्रवाई तय है—इसका सबसे बड़ा उदाहरण महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बन गया है।

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बरेली। नगर निगम को हल्के में लेना अब भारी पड़ने लगा है। शहरवासियों के साथ-साथ सरकारी महकमे भी अगर टैक्स नहीं देंगे तो कार्रवाई तय है—इसका सबसे बड़ा उदाहरण महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बन गया है। नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए एमजेपीआरयू के 14 बैंक खातों को एक साथ सीज कर दिया। करीब 16 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया और सालों से चली आ रही टालमटोल के कारण ये कार्रवाई की गई है।

नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय जोन-तीन में आता है और वर्ष 2014-15 से अब तक एक रुपया भी टैक्स जमा नहीं किया गया। बीते कई वर्षों में निगम की ओर से दर्जनों पत्र भेजे गए, बार-बार अनुरोध किया गया, राजस्व निरीक्षकों ने खुद जाकर संपर्क साधा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन हर बार आंख मूंदे बैठा रहा।

जब समझाइश, नोटिस और पत्राचार सब बेअसर साबित हुए, तो आखिरकार नगर आयुक्त के आदेश पर बुधवार को बड़ा एक्शन लिया गया। संबंधित बैंकों को निर्देश देकर विश्वविद्यालय के कुल 14 खातों पर ताला जड़ दिया गया। अब बहाने नहीं, पहले बकाया चुकाओ।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने दो टूक कहा कि बड़े बकायेदारों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा रुहेलखंड यूनिवर्सिटी पर भारी टैक्स बकाया था। बार-बार चेतावनी के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, इसलिए बैंक खाते सीज करने की कार्रवाई की गई है। जब तक पूरा टैक्स जमा नहीं होगा, सख्ती जारी रहेगी।


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