
Shardiya Navratri: कलश स्थापना क्यों और कैसे की जाती है, जानिए सामग्री और शुभ मुहूर्त,व्रत विधान और पूजा का महत्व
बरेली। शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) 29 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। सभी घरों में नवरात्र (Navratri) की तैयारियां चल रही हैं। नवरात्र में कलश स्थापना (Kalash Sthapna) का विशेष महत्त्व है। कलश या घट स्थापना नवरात्र के प्रथम दिन की जाती है। बाला जी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि नवरात्र में कलश स्थापना से ही देवी जी का आह्वाहन किया जाता है और उनकी स्थापना की जाती है और माता रानी की कृपा तभी प्राप्त होती है जब पूरे नौ दिन पूरे विधि विधान से माता रानी की पूजा की जाए। तभी आपका संकल्प पूरा होगा। उन्होंने बताया कि स्थापना के बाद जब दिन पूरे हो जाते और नक्षत्र पूरे हो जाते हैं तो विसर्जन भी बहुत जरूरी है नहीं तो पूजा पूरी नहीं होती है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त:- सूर्योदय से प्रातः 7: 40 बजे तकदूसरा मुहूर्त:- प्रातः 9:15 से अपराह्न 12:15 बजे तक(लाभ अमृत के चौघड़िया में)तीसरा मुहूर्त :- पूर्वाह्न 11: 45 से अपराह्न 12:30 बजे तक( अभिजित मुहूर्त)
पूजन सामग्री
चावल,सुपारी,रोली,मौली, जौ,सुगंधित पुष्प, केसर,सिंदूर,लौंग,इलायची, पान,श्रृंगार सामग्री, दूध,दही,गंगाजल,शहद,शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, विल्बपत्र, जनेऊ, मिट्टी का कलश,मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र,चंदन,चौकी,लाल वस्त्र, धूप,दीप, फूल,नैवेद्य, अबीर,गुलाल,स्वच्छ मिट्टी, थाली,कटोरी,जल,ताम्र कलश,रुई,नारियल आदि।
कैसे करें कलश स्थापना
पूजन सामग्री एकत्र कर प्रथम माँ दुर्गा का चित्र स्थापित कर एवं पूर्वमुखी होकर माँ दुर्गा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, माँ दुर्गा के बायीं ओर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर चावल के नौ कोष्ठक ,नवग्रह एवं लाल वस्त्र पर गेहूँ के सोलह कोष्ठक षोडशमातृ के बनाये, एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसके गले में मौली बांधकर उसके नींचे गेहूं अथवा चावल डालकर रखें,उसके बाद उस पर नारियल भी रखें,नारियल पर मौली भी बांधें,उसके बाद तेल का दीपक एवं शुद्द घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें एवं एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर हल्का सा गीला कर उसमें जौ के दाने डालें,उसे चौकी के बायीं तरफ कलश के पास स्थापित करें।अब सर्व प्रथम अपने बायें हाथ में जल लेकर दायें हाथ से स्वयं को पवित्र करें और बार बार प्रणाम करें।उसके बाद दीपक जलाएं एवं दुर्गा पूजा का संकल्प लेकर पूजा आरम्भ करें।
हाथी पर होगा आगमन
पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि इस वर्ष माता रानी का आगमन हाथी पर हो रहा है जिसके कारण बारिश अधिक होगी और माता रानी का गमन मुर्गे पर है जो रोगकारक है। उन्होंने बताया कि जिस तरह का फल होता है उसी तरह की पूजा की जाती है और ये असर चैत्र नवरात्र तक रहता है। इस लिए जनता के सुख के लिए हमे पूजा के दौरान उस तरह की प्रार्थना करनी चाहिए।
Published on:
29 Sept 2019 05:30 am
बड़ी खबरें
View Allबरेली
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
