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नवरात्र में कन्या पूजन के बगैर व्रत अधूरे, जानिए क्यों होती है पूजा और कन्या पूजा की विधि

रविवार को अष्टमी तिथि प्रातः 10:55 बजे तक रहेगी एवं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र अपराह्न 3:03 बजे तक रहेगा तदोपरांत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र आरम्भ होगा।

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नवरात्र में कन्या पूजन के बगैर व्रत अधूरे, जानिए क्यों होती है पूजा और कन्या पूजा की विधि

नवरात्र में कन्या पूजन के बगैर व्रत अधूरे, जानिए क्यों होती है पूजा और कन्या पूजा की विधि

बरेली। नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र में शक्ति साधना,पूजन,अनुष्ठान, व्रत आदि कन्या पूजन बिना अधूरे रहते हैं।कन्या साक्षात माँ जगदम्बा का रूप होती है जिस घर में त्योहार,शुभ मांगलिक कार्य में देव पूजन के साथ साथ कन्या पूजन भी होता है वहाँ कभी भी दुःख,दरिद्रता नही आ सकती।

क्यों होता है कन्या पूजन
बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार देवराज इंद्र ने ब्रह्मा जी से भगवती देवी को प्रसन्न करने का उपाय पूंछा,तो ब्रह्मा जी ने देवी को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय कुमारी पूजन बताया। इसलिये नवरात्र में देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनका पूजन किया जाता है। जिससे घर में सुख,शांति,सम्पन्नता आती है।कन्या पूजन के लिए 10 वर्ष तक की कन्याएँ ही श्रेष्ठ पूज्नीय हैं।1 वर्ष अथवा उससे छोटी कन्या का पूजन उचित नहीं है,क्योंकि 2 से 10 वर्ष तक आयु वाली बालिकाएं ही कुमारिका होती है,उन्ही का पूजन श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिपदा से सप्तमी तक एक एक कन्या का और अष्टमी व नवमी को नौ- नौ कन्याओं का पूजन करके व्रत खोला जाता है।कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी को शुभ माना जाता है। अष्टमी अथवा नवमी को नौ कन्याओं और एक भैरों स्वरूप बालक के पूजन का विधान शास्त्रों में वर्णित है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं को अलग अलग नाम से जाना जाता है।उनके पूजन से अलग अलग फलों की प्राप्ति बताई गई है
1. कुमारी :- 2 वर्ष की कन्या को कुमारी कहते हैं।जिनका पूजन करने से दरिद्रता दूर होती है।

2. त्रिमूर्ति:- 3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति कहलाती है।इनका पूजन करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

3. कल्याणी :- 4 वर्ष की कन्या कल्याणी कहलाती है जिनका पूजन करने से बुद्धि,विद्या,सुख की प्राप्ति होती है

4. रोहिणी :-5 वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है।जिनका पूजन करने से बीमारी दूर होती है।

5. कालिका :-6 वर्ष की कन्या कालिका कहलाती है।इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है।

6. चण्डिका :-7 वर्ष की कन्या चण्डिका कहलाती है, जिनके पूजन से प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

7. शाम्भवी :-8 वर्ष की कन्या शाम्भवी कहलाती है।

8. दुर्गा:-9 वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है।इनके पूजन से पूर्ण शुभ फलों की प्राप्ति बताई गई है।

9. सुभद्रा :-10 वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है, जिनके पूजन से सौभाग्य प्राप्ति के साथ सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

कन्या पूजन विधि
कन्या पूजन नवरात्र व्रत में अनिवार्य है।एक चौकी पर आसान बिछाकर गणेश,बटुक तथा कन्याओं को एक पंक्ति में बैठाकर *ॐ गंग गणपतये नमः से श्री गणेश जी का पंचोपचार पूजन करें, ॐ बटुकाय नमः से बटुक जी तथा ॐ कुमारिकाएँ नमः से कन्याओं का पूजन करें।इसके बाद हाथ में पुष्प लेकर कन्याओं की प्रार्थना करें।


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