
बरेली। नवाबगंज क्षेत्र में जमीन के विवाद ने एक परिवार को तबाह कर दिया। बेटे ने ही पिता की हंसिया से हत्या कर दी। कोर्ट ने इस सनसनीखेज मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मां और छोटे भाई की अहम गवाही ने पूरे केस की दिशा बदल दी।
विशेष न्यायाधीश गैंग्स्टर एक्ट तबरेज अहमद की अदालत ने मां और छोटे भाई की गवाही को भरोसेमंद मानते हुए आरोपी छत्रपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने उसे उम्रकैद के साथ एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। एडीजीसी दिगंबर पटेल के अनुसार, घटना 11 अप्रैल की है। नवाबगंज के इनायतपुर गांव निवासी ताराचंद ने अपने बड़े भाई छत्रपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि खेत से शराब पीकर लौटे छत्रपाल का पिता लालाराम से जमीन को लेकर विवाद हो गया।
विवाद इतना बढ़ा कि छत्रपाल ने हंसिया से पिता की गर्दन पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल लालाराम को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के दौरान आरोपी ने अपनी मां रामदेई पर भी हमला किया। गवाही में रामदेई ने बताया कि वह आंगन में सब्जी काट रही थीं, तभी बेटे ने उनके हाथ पर हंसिया से वार कर दिया। जब उन्होंने शोर मचाया तो पति लालाराम बचाने आए, लेकिन आरोपी ने उन पर भी जानलेवा हमला कर दिया।
परिवार के अन्य सदस्यों ने कोर्ट में बताया कि 10 बीघा जमीन को लेकर छत्रपाल अक्सर पिता से झगड़ा करता था। वह जमीन अपने नाम कराने का दबाव बना रहा था, इसी बात को लेकर घटना वाले दिन विवाद बढ़ गया। मामले में सात गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। सभी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना और सख्त सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि पारिवारिक विवाद में भी कानून से कोई नहीं बच सकता।
Published on:
19 Mar 2026 09:54 pm
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