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लूट का अड्डा बन गया सनराइज अस्पताल, इज्जतनगर पुलिस करेगी डॉक्टर और मैनेजर की वसूली की जांच

इज्जतनगर थाना क्षेत्र के सौफुटा मोड़ स्थित सनराइज मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का झांसा देकर गरीब परिवार से साढ़े पांच लाख रुपये वसूले। मरीज की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर रिहान अहमद और मैनेजर सोहिल खान के खिलाफ भमोरा पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की, अब इज्जतनगर पुलिस विवेचना करेगी।

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बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र के सौफुटा मोड़ स्थित सनराइज मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल ने गरीब परिवार के साथ जिस तरह की धोखाधड़ी की, वह शर्मनाक और बेशर्मियत की हदें पार कर गई। आरोप है कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का वादा किया, लेकिन फिर गरीब परिवार से साढ़े पांच लाख रुपये से अधिक की लूट कर डाली।

भमोरा थाना क्षेत्र के गांव शिझरी की निवासी लक्ष्मी देवी ने बताया कि 25 सितंबर को उनके 31 वर्षीय पति उर्वेश कुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के डॉक्टर रिहान अहमद और मैनेजर सोहिल खान ने आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज का वादा किया। लेकिन महज दो घंटे के अंदर ही रुपये मांगना शुरू कर दिया। विरोध करने पर उन्हें धमकी दी गई कि रुपये नहीं दोगे तो मरीज मर जाएगा। सरकार से पैसा मिलने पर सब लौटवा देंगे।

मजबूरी में लक्ष्मी देवी ने कर्ज लेकर किस्तों में 5,33,500 रुपये जमा किए। इसके बावजूद, 2 अक्टूबर की शाम 6:15 बजे उर्वेश कुमार की मौत हो गई। जब परिवार ने पोस्टमार्टम कराने की मांग की, तो अस्पताल में हंगामा मच गया। आरोप है कि डॉक्टर और मैनेजर मौके पर पहुंचे और धमकाया, शोर मत मचाओ, सारा पैसा लौटवा देंगे, सरकार से भी पांच लाख दिलवा देंगे।

भमोरा थाना पुलिस ने पहले ही डॉक्टर रिहान अहमद और मैनेजर सोहिल खान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। अब यह मामला इज्जतनगर थाना में ट्रांसफर कर दिया गया है। पुलिस ने मामले की सख्त जांच शुरू कर दी है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि वसूली का अड्डा साबित होगा। उर्वेश कुमार की मौत ने इस पूरे मामले में सवालों की झड़ी लगा दी है, और प्रशासन पर गंभीर जांच की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।

वहीं समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर कहा कि यह सिर्फ मौत का मामला नहीं, बल्कि अस्पताल और पत्रकार पर हमले से जुड़ा गंभीर प्रकरण है। उन्होंने सोमवार को आला अधिकारियों से मुलाकात कर FIR दर्ज कराने की मांग रखने का ऐलान किया। प्रशासन की चुप्पी और जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल उठते रहे, वहीं सामाजिक और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस मुलाकात पर हैं, जो तय करेगी कि कानून की कार्रवाई कब और कैसे शुरू होगी।

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