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नगर आयुक्त से वार्ता विफल, सड़क पर प्रदर्शन, भूख हड़ताल की चेतावनी, निगम कर्मी भी गए हड़ताल पर

बरेली। परसाखेड़ा गौटिया और गोकिलपुर गगईया में सड़क न बनने से नाराज ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन नगर निगम गेट पर दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार को नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने कुछ ग्रामीणों से बातचीत की जो विफल हो गई। नगर आयुक्त ने शासन को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया, जबकि ग्रामीण लिखित में मांगते रहे। ग्रामीणों ने शाम चार बजे भूख हड़ताल की चेतावनी दी।

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उधर, नगर निकाय कर्मचारियों की 13 सूत्री मांगों का निस्ताण न होने पर कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने कार्यबंदी करते हुए विरोध शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जताया विरोध

76 साल से सड़क न बनने से नाराज ग्रामीण शुक्रवार सुबह से धरना दे रहे है। बेहद ठंडे मौसम में रात काटने के बाद सुबह अधिकारियों के आने का इंतजार किया। इस दौरान ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध भी किया। जिससे कुछ देर के लिए जाम की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि कोतवाली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण कर लिया। काफी देर इंतजार करने के बाद नगर आयुक्त ने ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया। ग्रामीण सुखदीश कश्यप दो-चार ग्रामीण महिलाओं के साथ बातचीत करने पहुंचे। नगर आयुक्त ने सड़क बनवाने का प्रस्ताव शासन को भेजकर जल्द निर्माण कराने का आश्वासन दिया। इसपर ग्रामीणों ने लिखित में जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन मांगा। वार्ता विफल होने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और तेज हो गया। उन्होंने बताया कि जो राशन वह लेकर आए थे वह खत्म हो चुका है। अब वह चार बजे से भूख हड़ताल करेंगे जब तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो जाता। दोपहर तक कोतवाली पुलिस फोर्स नगर निगम गेट पर तैनात थी।

नगर निगम के कर्मचारी एक दिवसीय कार्यबंदी पर

मंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर कई बार बैठक होने के बावजादू नगर निकाय कर्मचारियों की 13 सूत्री मांगों का निस्ताण नहीं हो पाया है। बैठकों में सहमति के बाद भी इससे संबंधित शासनादेश जारी न होने से नाराज निकाय कर्मचारियों ने अब आंदोलन शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने शनिवार को बैठक करके कार्यबंदी करते हुए विरोध शुरू कर दिया। संगठन के जयपाल सिंह पटेल, ताहिर कमाल, अमित कुमार दुबे, चौधरी महक सिंह और राजकुमार समदर्शी ने कहा कि शासन स्तर पर होने वाली बैठकों में सहमति तो बनती है, लेकिन उस पर अमल कभी नहीं होता है। उच्चाधिकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों का निस्तारण करने में ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी 10 नवंबर को भी प्रमुख सचिव नगर विकास की मौजूदगी में बैठक हुई थी, लेकिन उस बैठक में भी जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उसका आदेश अब तक जारी नहीं हुआ है। इसलिए निकाय कर्मचारियों के सामने अब आंदोलन ही एक रास्ता बचा है। मांग नहीं मानी गई तो इस आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा । इसमें कार्य बहिष्कार से लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी घोषणा की जाएगी।