सेन्ट्रल जेल में बंद कैदियों ने स्वतन्त्रता दिवस पर 'ताजमहल का टेंडर' शीर्षक पर नाटक का मंचन किया जिसमें आज की व्यवस्था पर कटाक्ष किया गया। किशोर सदन में आयोजित हुए नाटक का मंचन कर कैदियों ने खूब तालियां बटोरीं। नाटक में दिखाया गया है कि शाहजहां 21वीं शताब्दी में ताजमहल बनाने का ख़्वाब देखेते हैं और इसके लिए बजट कैसे तय होता है।
मौजूगदा सरकारी तंत्र पर कटाक्ष
21वीं सदी में ताजमहल बनवाने के लिए शाहजहां को दरबारी राय देते हैं कि ताजमहल बनाने के लिए टेंडर निकाला जाए जिससे खर्चा काम हो। जिसके बाद शुरू होती है ताजमहल को बनाने की जद्दोजहद। जिस तरह आज के समय में कोई निर्माण बिना कमीशन के नहीं होता कुछ ऐसे ही हालात का सामना शाहजहां को भी करना पड़ा। आज के समय से तुलना करते हुए मुगलकालीन द्र्श्य को कैदियों ने दमदार अभिनय कर खूब तालियां बटोरी।
इन्होंने निभाए किरदार
नाटक का निर्देशन अमित रंगकर्मी ने किया। शाहजहां का किरदार शेर सिंह तो नेता का किरदार सोमपाल ने निभाया इसके साथ ही जितेंद्र कुमार, राय सिंह, शिव कुमार आदि कैदियों ने भी नाटक का मंचन किया।