
बरेली। जिला महिला अस्पताल से 21 दिन की मासूम बच्ची के अपहरण की खबर ने सनसनी फैला दी, लेकिन कुछ ही घंटों में पुलिस ने ऐसा सच उजागर किया जिसने पूरे मामले को पलट कर रख दिया। बच्ची चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उसे खुद मां-बाप ने ही दे दिया और फिर समाज के डर से अपहरण का झूठा नाटक रच दिया।
शुक्रवार रात करीब 9 बजे इज्जतनगर के परतापुर चौधरी निवासी मकसूद ने पुलिस को फोन कर बताया कि जिला अस्पताल से उसकी 21 दिन की बच्ची चोरी हो गई है। सूचना मिलते ही पुलिस दौड़ पड़ी। इज्जतनगर और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जैसे ही पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, कहानी यहीं लड़खड़ा गई। कैमरों में न तो महिला दिखी और न ही उसका पति। हर एंगल चेक हुआ लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। यहीं से पुलिस को पूरा मामला फर्जी लगने लगा।
जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो मकसूद ज्यादा देर टिक नहीं पाया। उसने कबूल किया कि तीसरी बेटी होने के कारण उसने 21 दिन की बच्ची को बहेड़ी के शेखूपुर निवासी शबा बी को दे दिया था। उसके मुताबिक पहले से दो बेटियां हैं और महंगाई में तीन बेटियों का खर्च उठाना मुश्किल था। पूछताछ में सामने आया कि बच्ची को देने के बाद दंपती को समाज और रिश्तेदारों के सवालों का डर सताने लगा। बदनामी से बचने के लिए उन्होंने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी ताकि कोई शक न करे।
पुलिस टीम ने बहेड़ी पहुंचकर बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया। अब बाल कल्याण समिति के जरिए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि बच्ची को सुरक्षित तरीके से आगे की देखरेख मिल सके। पुलिस ने साफ कर दिया है कि झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह करना हल्की बात नहीं है। दंपती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
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Published on:
28 Mar 2026 06:15 pm
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