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केंद्रीय मंत्री की बहन फरहत नकवी को इस्लाम से खारिज करने की तैयारी

तलाक पीड़ित महिलाएं बोलीं हम हैं फरहत नकवी के साथ। हमारी मुश्किल में उलेमाओं ने नहीं सुनी हमारी बात, फरहत ने दिया था हमारा साथ।

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farhat

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बरेली। तीन तलाक और हलाला प्रथा को लेकर इस समय देशभर में चर्चा हो रही है। इन्हीं चर्चाओं के बीच तलाक पीड़ित महिलाओं की मदद करने वाली दो समाज सेवियों फरहत नकवी और निदा खान को इस्लाम से खारिज करने की बात की जा रही है। शहर इमाम ने दोनों को आजाद खयाल की महिलाएं बताते हुए इस्लाम से खारिज करने की बात कही है। इस मामले में तलाक पीड़ित महिलाएं मेरा हक की अध्यक्षा और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत नकवी के पक्ष में खुल कर सामने आ गई हैं।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जब हम इंसाफ़ की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे, उस वक्त यही धर्म के ठेकेदार छुपे हुए थे और उन्होंने दारुल इफ्ता के चक्कर काटे। उस वक्त वहां हमारी कोई सुनने वाला कोई नहीं था। लेकिन फरहत नकवी ने हमारा साथ दिया इसलिए हम सभी पीड़ित मुस्लिम महिलाएं फरहत नक़वी का समर्थन करते हैं।

15 साल भटकने पर भी नहीं मिला इंसाफ
फरहत का समर्थन करने वाली तलाक पीड़ित फातिमा नूरी का कहना है कि उसके पति ने तीन तलाक़ देकर उसे दो बच्चों के साथ घर से निकाल दिया था। फिर दोबारा निकाह करने लिए हलाला कराने के लिए मजबूर किया और एक आदमी से जबरन हलाला करवाया। उसके बाद दोबारा निकाह भी नहीं किया। फातिमा नूरी का कहना है कि वो 15 साल से इंसाफ के लिए उलेमाओं से गुहार लगाती रही, लेकिन उसे इंसाफ नहीं मिला। इसके साथ ही उसने कहा कि मैने शादी से पहले इस्लाम की मोहब्बत में धर्म परिवर्तन किया और मैं रंजीत कौर से फातिमा नूरी बनी, फ़िर भी मेरा इस धर्म के ठेकेदारों ने साथ नहीं दिया। आज अगर मेरा हक़ फाउन्डेशन की अध्यक्ष फरहत नक़वी हमारी आवाज़ उठाने के लिए आगे आईं हैं तो हम उनका समर्थन करते हैं।

पति ने निकाल दिया घर से
एक अन्य पीड़ित महिला रूहीना खातून का कहना है कि मेरे पति ने मुझे दो बच्चियों के साथ धक्के देकर घर से बाहर निकाला और फिर कोई ख़बर तक नहीं ली। इसी बीच दो साल की मेरी मासूम बच्ची ने कैंसर की बीमारी से दम तोड़ दिया। उसी दिन मेरे पति ने दूसरी शादी की और बच्ची के जनाजे पर भी नहीं आया। उस वक्त मैं इंसाफ की तलाश में दर बदर भटकती रही। उलेमाओं के पास गई मगर मेरी फरियाद कोई सुनने आगे नहीं आया। उस अंधेरी ज़िन्दगी में उजाला बनके मेरा साथ मेरा हक़ फाउन्डेशन की अध्यक्षा फरहत नक़वी ने दिया इसलिए अब हम सब मेरा हक़ फाउन्डेशन की अध्यक्षा फरहत नक़वी के साथ खड़े हैं।

फरहत की वजह से मिली मदद
तलाक पीड़ित रजिया जिसकी अभी हाल में ही इलाज के दौरान मौत हो गई उसकी भाभी नसरीन ने कहा कि मेरी नन्द रज़िया को उसके पति नईम ने तलाक देने के बाद खूब प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई। हमारी किसी ने मदद नहीं की लेकिन फरहत नक़वी ने हमारा साथ दिया। रज़िया को अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करवाया तथा पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करवाई। इसी बीच रज़िया का इंतकाल हो गया तो फरहत नकवी ने ही रज़िया के पति को जेल भिजवाया। हम परिवार वाले कुछ न कर पाते अगर फरहत नक़वी ने हमारा साथ न दिया होता। कंधे से कंधा मिलाकर हर मुश्किल में हमारा साथ देने वाली फरहत नक़वी के साथ हमारा पूरा परिवार खड़ा है।

मैं डरने वाली नहीं
वहीं फरहत नकवी का कहना है कि वो तलाक पीड़ित महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ती रहेंगी और किसी की भी धमकी से डरने वाली नहीं हैं। वो पीड़ित महिलाओं की आवाज शासन प्रशासन तक पहुंचाती रहेंगी।