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आयुष्मान की आड़ में वसूली का जाल, एक्सपायर दवा, फर्जी ICU भर्ती और कैश कलेक्शन, सीएमओ ने तीन हॉस्पिटल पर की ये कार्रवाई

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज का भरोसा देने वाली आयुष्मान भारत योजना की आड़ में शहर के तीन निजी अस्पतालों में खेल चलता मिला।

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बरेली। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज का भरोसा देने वाली आयुष्मान भारत योजना की आड़ में शहर के तीन निजी अस्पतालों में खेल चलता मिला। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्टेडियम रोड स्थित डॉ. एम. खान हॉस्पिटल, सांई हॉस्पिटल और माघोबाड़ी के वंश हॉस्पिटल में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने आयुष्मान योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कहीं एक्सपायर दवाएं मिलीं, तो कहीं लाभार्थियों से खुलेआम नगद वसूली की जा रही थी। कार्रवाई की भनक लगते ही अस्पताल प्रबंधन में अफरातफरी का माहौल बन गया।

आईसीयू में खामियां, एक्सपायर दवाएं और कैश वसूली

स्टेडियम रोड स्थित डॉ. एम. खान हॉस्पिटल के आईसीयू का निरीक्षण करते समय टीम ने पाया कि स्टाफ निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किए बिना मरीजों को दवाएं दे रहा था। इमरजेंसी ड्रग ट्रॉली में एक्सपायर दवाएं रखी मिलीं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ मानी जा रही हैं। इतना ही नहीं, आयुष्मान योजना के तहत भर्ती तीन मरीजों फारुख, शाहिद और जीनत से 1100, 1200 और 2200 रुपये जांच के नाम पर नगद लिए जाने की बात सामने आई। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट भी नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इन सभी बिंदुओं पर अस्पताल प्रशासन से लिखित जवाब मांगा गया है।

सामान्य मरीज को आईसीयू में रखकर बढ़ाया जा रहा था खर्च

स्टेडियम रोड पर सांई हॉस्पिटल में निरीक्षण के दौरान टीम ने एक आयुष्मान लाभार्थी महिला मरीज को सामान्य स्थिति में होने के बावजूद आईसीयू में भर्ती पाया। आईसीयू का अनावश्यक उपयोग न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे इलाज का खर्च भी बढ़ता है। जनरल वार्ड में भर्ती प्रेमवती नामक महिला ने बताया कि उससे खून की जांच और अन्य परीक्षणों के लिए 3800 रुपये नगद लिए गए। आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह मुफ्त होने के बावजूद इस तरह की वसूली ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीम ने मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।

24 आयुष्मान मरीज भर्ती, फिर भी जांच के नाम पर रकम

माघोबाड़ी स्थित वंश हॉस्पिटल में आईसीयू वार्ड खाली मिला, जबकि इमरजेंसी वार्ड में आयुष्मान योजना के 24 लाभार्थी भर्ती थे। निरीक्षण के दौरान कई मरीजों जिनमें सुषमा पाल, इरशाद, आबिद और मनोरमा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उनसे जांच के लिए नगद भुगतान कराया गया। इसके अलावा यहां भी बायोमेडिकल वेस्ट का पृथक्करण तय मानकों के अनुसार नहीं पाया गया। इतने बड़े स्तर पर लाभार्थियों की मौजूदगी के बावजूद व्यवस्थाओं में कमी ने अस्पताल की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया।

दोबारा गड़बड़ी हुई तो जाएगी सूचीबद्धता

निरीक्षण के बाद सीएमओ विश्राम सिंह ने तीनों अस्पतालों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन और लाभार्थियों से नगद वसूली किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में इस तरह की शिकायत दोहराई गई तो संबंधित अस्पतालों की आयुष्मान योजना से सूचीबद्धता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीनों अस्पतालों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।