
वो मुझे छोड़ के यूं आगे बढ़ा जाता है...
प्रो. बरेलवी ने बताया कि मुशायरों में कई वार हम लोग मंच पर साथ रहे। उन्होंने मुझे हमेशा इज्जत दी। उन्होंने उनकी शायरी पर कहा कि उर्दू शायरी में उन्होंने घरेलू रिश्तों और विशेष तौर पर मां को गजल में एक पात्र के तौर पर पेश करके अपनी अलग पहचान बनाई और लोकप्रियता हासिल की, जो स्वयं में एक मिसाल है। वह बहुत जहीन थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शेरो अदब के लिए समर्पित कर दी। उन्होंने कहा कि राहत इंदौरी के बाद अब मुनव्वर चले गए, बशीर बद्र साहब बीमार चल रहे हैं। उर्दू अदब का मंच खाली होने लगा है। मुनव्वर राना के लिए उन्होंने शेर पढ़ा- वो मुझे छोड़ के यूं आगे बढ़ा जाता है, जैसे अब मेरा सफर खत्म हुआ जाता है।
सुरमा व्यवसायी हसीन हाशमी के अच्छे दोस्त थे मुनव्वर
प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना बरेली में प्रसिद्ध सुरमा व्यवसायी मरहूम एम. हसीन हाशमी के अच्छे दोस्त थे। वह आखिरी चार वर्ष 2015 में यहां बिशप मंडल इंटर कालेज के मैदान पर हुए मुशायरे में शामिल होने बरेली आए थे। मुशायरे में जाने से पहले वह हसीन हाशमी से मिलने उनके दरवाजा स्थित निवास पर मिलने पहुंचे थे। हसीन हाशमी के पुत्र हाजी शावेज हाशमी ने बताया कि मुनव्वर साहब जब भी बरेली आते या बरेली से गुजरते तो वालिद से मिलने घर जरूर आते थे।
Published on:
16 Jan 2024 01:11 pm
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