
Labour Office balotra
जिला मुख्यालय से सौ किमी दूर श्रम विभाग का जिला कार्यालय होने के कारण हजारों श्रमिकों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। जिले के लगभग 3 लाख श्रमिकों में से मात्र 15.6 फीसदी श्रमिक ही पंजीकृत है।
श्रमिकों के हितो की रक्षा के लिए सरकार की ओर श्रम विभाग के मार्फत योजनाओं में लाया गया है। विभाग को अपनी योजनानुसार अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करके हर श्रमिक को सरकारी योजना से लाभान्वित करना होता है। इससे श्रमिकों को समय-समय पर सहारा भी मिलता रहता है, लेकिन बाड़़मेर का श्रम विभाग कार्यालय जिला मुख्यालय से 100 किमी दूर बालोतरा उपखंड मुख्यालय पर स्थित है। ऐसे में जिला मुख्यालय व क्षेत्र के हजारों श्रमिकों को श्रम विभाग की जानकारी ही नहीं है। इसके साथ ही उन श्रमिकों का हिताधिकारी पंजीयन तक नहीं है।
15.6 प्रतिशत ही पंजीकृत
जानकारी अनुसार जिले में लगभग तीन लाख श्रमिक हैं, लेकिन श्रम विभाग में मात्र 47 हजार श्रमिक (15.6 फीसदी) हिताधिकारी पंजीकृत हैं। ऐसे में हजारों श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
ये हैं योजनाएं
- श्रम विभाग की ओर से श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रसूता सहायता योजना के तहत पंजीकृत श्रमिक के लड़का होने पर 20 हजार व लड़की होने पर 21 हजार रुपए मिलते हैं।
- शिक्षा सहायता योजना व कौशल विकास योजना के तहत श्रमिक की संतान को कक्षा आठ से स्नातकोत्तर तक अध्ययन व कोर्स के लिए 8 हजार से 25 हजार रुपए की अलग-अलग कक्षाओं के अनुसार सहायता मिलती है।
- निजी आवास योजना के तहत 1.50 लाख रुपए सहित लगभग तेरह प्रकार की श्रमिकों के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित हो रही है।
फैक्ट फाइल
03 लाख के करीब श्रमिक हैं बाड़मेर में
47 हजार पंजीकृत श्रमिक
15.6 फीसदी ही है पंजीकृत
84.4 फीसदी श्रमिक अपंजीकृत
केस 1 : विभाग की ही जानकारी नहीं
बाबूलाल (56) पुत्र पन्नाराम कमठा श्रमिक है, लेकिन जिला मुख्यालय पर श्रम विभाग का कार्यालय नहीं होने से उसे श्रम विभाग की जानकारी नहीं है। उसके दो संतान है। एक बीए में अध्यनरत है तथा दूसरा बच्चा 12वीं में 65 फीसदी अंक लेकर आया है। जानकारी के आभाव में उसे किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
ये लाभ नहीं मिला : बाबूलाल का हिताधिकारी पंजीयन होता तो उसके बच्चों की पढ़ाई के लिए एक शैक्षणिक सत्र के लिए 5 से 20 हजार रुपए मिलते, लेकिन पंजीयन नहीं होने से एक भी सत्र में कोई राशि नहीं मिली।
केस 2 : नहीं मिली विवाह सहायता
बाबूलाल (53) पुत्र गोपालदास कमठा मजदूर है। श्रम विभाग की जानकारी तो है, लेकिन कम पढ़ा-लिखा होने के साथ ही बालोतरा तक आने-जाने में दिक्कत महसूस करता है। श्रम विभाग कार्यालय बाड़मेर शहर में नहीं होने से अभी तक उसने पंजीयन नहीं करवाया और ना ही श्रम विभाग की किसी योजना का लाभ उसे मिला है।
ये लाभ नहीं मिला : बाबूलाल की एक पुत्री का विवाह हुआ है। श्रम विभाग की ओर से श्रमिकों की अविवाहित लड़कियों के लिए विवाह सहायता योजना के तहत 55 हजार रुपए की सहायता दी जाती है, लेकिन वह वंचित रह गया।
केस 3 : मारी जाती है दिहाड़ी
मिश्रीमल (45) पुत्र मुकनाराम श्रम विभाग में महज इसलिए अपना पंजीयन नहीं करवा पा रहा, क्योंकि श्रम विभाग कार्यालय 100 किमी दूर है। वहां जाने-आने में एक दिन लग जाता है और दिहाड़ी से वंचित न हो, इसलिए वह आज तक पंजीयन नहीं करवा पाया। छह माह पूर्व मजदूरी करते समय दायां पैर फ्रेक्चर हो गया था, लेकिन उसे कोई लाभ नहीं मिला।
ये लाभ नहीं मिला : श्रमिक की बीमा योजना के तहत दुर्घटना में स्थाई पूर्ण अशक्तता पर 75 हजार व सामान्य दुर्घटना में घायल होने पर तीन लाख रुपए की सहायता मिलती है, लेकिन मिश्रीमल को बिना पंजीयन कोई लाभ नहीं मिला।
केस 4 : पंजीयन नहीं तो लाभ नहीं
पत्थर घड़ाई मजदूर खीमाराम (35) पुत्र जीवाराम को श्रम विभाग की कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में खीमाराम का हिताधिकारी पंजीयन नहीं हो पाया। 18 मई को मजदूरी करते समय अचानक तबीयत बिगडऩे के बाद बाड़मेर चिकित्सालय लाया गया। इससे कोई फर्क नहीं पडऩे पर जोधपुर लेकर गए। जोधपुर में भर्ती करने के बाद 22 मई को उसकी मृत्यु हो गई। उसकी दो पुत्रियां हैं, जो आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से स्कूल नहीं जा रही।
ये लाभ नहीं मिला : श्रम विभाग की सामान्य अथवा दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपए मिलते हैं। कौशल शक्ति योजना व शुभ शक्ति योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में खीमाराम का लड़का मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहा है।
हजारों श्रमिक योजनाओं से वंचित
श्रम विभाग का कार्यालय जिला मुख्यालय पर नहीं होने से हजारों श्रमिक योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में श्रम विभाग का जिला कार्यालय बाड़मेर स्थानांतरण करने की आवश्यकता है। यह पहल श्रमिकों के लिए लाभदायक साबित होगी।
मोडाराम, उपाध्यक्ष, कमठा मजदूर संगठन बाड़मेर
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