
शिक्षक ना सुविधाएं, बस नाम मात्र के अंग्रेजी मीडियम स्कूल
सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा का सपना दिखाकर प्रदेश में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले गए। करीब सात वर्ष पूर्व शुरू किए गए ये स्कूल अभी तक अंग्रेजी माध्यम के ढांचे में पूर्णतः नहीं ढल पाए हैं। न तो अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग कैडर बनाया गया, न ही पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति हुई। और न ही कक्षा कक्षों की पर्याप्त व्यवस्था की गई। ऐसे में ये स्कूल नाममात्र के अंग्रेजी माध्यम में संचालित हो रहे हैं।
कक्षा कक्षों की कमी:
इन 123 स्कूलों में अधिकांश हिंदी माध्यम के पुराने विद्यालयों को ही अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित कर शुरू किया गया है। इनमें से 40-45 विद्यालयों में कक्षा कक्षों की भारी कमी है। कई स्थानों पर कक्षाएं छप्पर, टिनशेड या पेड़ों के नीचे संचालित की जा रही हैं।
आधे से ज्यादा पद रिक्त:
123 स्कूलों में वर्तमान में केवल 622 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि लगभग 700 पद रिक्त हैं। अधिकांश विद्यालयों में विद्यार्थियों की निगरानी तक के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। नियुक्त शिक्षक हिंदी माध्यम से साक्षात्कार द्वारा चयनित हुए हैं। अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग कैडर की घोषणा तो हुई, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कैडर बनाने की आवश्यकता:
सात साल बीतने के बावजूद महात्मा गांधी स्कूलों के लिए अलग कैडर नहीं बना है। इससे अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही है। यदि सरकार शीघ्र निर्णय नहीं लेती, तो इन विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
- बसंत कुमार जाणी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा, बाड़मेर
Published on:
19 May 2025 02:27 pm
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