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50 लाख मांगे नहीं दिया….तिलवाड़ा मेले में एक करोड़ का घोड़ा

बाड़मेर.श्याम घोड़ा सिंधी नस्ल का है। ऊॅंची कद काठी और मैदान में दौड़ता है तो तूफान की तरह। 50 लाख में इसको खरीददार आए लेकिन मालिक रूपसिंह राठौड़ खारा ने मना कर दिया। वे इसे करोड़ रुपए से कम का नहीं मानते। खुमाणसिंह सोढ़ा केे पास चार घोड़े है,इसमें से तूफान और मलंग की कीमत […]

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बाड़मेर.
श्याम घोड़ा सिंधी नस्ल का है। ऊॅंची कद काठी और मैदान में दौड़ता है तो तूफान की तरह। 50 लाख में इसको खरीददार आए लेकिन मालिक रूपसिंह राठौड़ खारा ने मना कर दिया। वे इसे करोड़ रुपए से कम का नहीं मानते। खुमाणसिंह सोढ़ा केे पास चार घोड़े है,इसमें से तूफान और मलंग की कीमत वे 20 से 25 लाख के बीच में आंकते है पर कहते है बेचूंगा फिर भी नहीं।
तिलवाड़ा मेले में घोड़ों की रंगत परवान पर है। मालाणी नस्ल के बेहद खूबसूरत सैकड़ों घोड़े पहुंच गए है जिनकी कद-काठी और उन पर जवानी का नूर उनको सबसे अलग करता है। इस नस्ल के घोड़ों के मालिक अपने घोड़ों की कीमत लाखों में आंक रहे है। पंजाब से आए सुखजिंदरसिंह कहते है कि मालाणी नस्ल के घोड़ों के लिए ही इस मेले में पहुंचते है। इधर, सिंधी नस्ल के घोड़ों को लेकर आए रूपसिंह खारा का घोड़ा सबसे चर्चित है। उनके पास श्याम और बाज दो घोड़े है। श्याम पचास लाख देने पर भी नहीं बेच रहे है। बाज भी इसी नस्ल का है। सिंधी नस्ल के घोड़े यहां एक लाख से पचास लाख तक कीमत तक पहुंच गए है।
घोड़ों की कीमत बढ़ रही
मालाणी, सिंधी, काठियावाड़ी तीनों नस्ल के घोड़े यहां पहुंचे है। पंजाबी घोड़ों की भी कतार लगी है। पंजाबी खरीददार ज्यादा है। हरियाणा से पहुंचे व्यापारी समरजीतङ्क्षसह कहते है कि तिलवाड़ा मेले में अच्छी नस्ल के पैठबंध घोड़े मिलते है इसलिए हम यहां पर आते है। यह एकदम असल नस्ल है। व्यापारी कहते है कि घोड़ों की कीमत बढ़ रही है। अब शौक से घोड़े पालने का बड़ा चलन फिर से शुरू हुआ है।
काजू-बादाम-घी और पौष्टिक खाना

घोड़ों को घी, काजू,बादाम, मूंगफली और कई प्रकार के पौष्टिक आहार खिलाए जाते है। इनका ख्याल रखने के लिए आदमी है जो इनकी खुराक और हर हरकत पर नजर रखता है। जैसे ही अहसास होता है कि घोड़ा थोड़ा सा भी मायूस है इसका तत्काल इलाज करवाते है। घोड़ों के मालिक श्यामसिंह कहते है घोड़ा पालना मुश्किल काम है, पर शौक और शान दोनों जिसके दिमाग में हों फिर वो पीछे मुडकऱ नहीं देखता।