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धूल में उड़ गया राख के बूते थार में सीमेंट बनाने का सपना, पढ़िए पूरी खबर

- 1080 मेगावाट का है यहां लिग्नाइट पॉवर प्लांट,25000 टन कोयला प्रतिदिन लिया जाता है काम में  
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बाड़मेर

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bhawani singh

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Updated: 11 Nov 2017, 11:34 AM IST

barmer news

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रतन दवे@बाड़मेर. सीमावर्ती बाड़मेर जिले के भादरेस में 1080 मेगावाट का लिग्नाइट पॉवर प्रोजेक्ट और जैसलमेर के सोनू में लाइम स्टोन का भरपूर भण्डार होने के बावजूद दोनों जिलों में सीमेंट के कारखाने स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। सीमेंट की राख और लाइम स्टोन दोनों ही यहां से सिरोही, जोधपुर , ब्यावर, चित्तौडग़ढ़ व अन्यत्र भेजी जा रही है। ताज्जुब है कि राख तो मुफ्त में दी जा रही है। जबकि यहां सीमेंट उद्योग का सपना पॉवर प्लांट के साथ ही देखा गया था।

वर्ष 2006 में बाड़मेर के भादरेस में लिग्नाइट आधारित पॉवर प्लांट लगा। यहां 1080 मेगावाट विद्युत उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है। इसके लिए प्रतिदिन 25 हजार टन कोयला काम में लिया जाता है। इसकी 13 प्रतिशत तक राख बनती है। लाइम भी कोयले के साथ मिलने के बाद करीब 3500 टन राख प्रतिदिन बनती है। इस राख का उपयोग सीमेंट कारखानों में ही होता है। इसके लिए ब्यावर, जोधपुर, सिरोही, चित्तौडग़ढ व अन्य प्लांट के कारखानों को यह राख प्लांट की ओर से मुफ्त में दी जाती है। वजह यही है कि यहां पर सीमेंट कारखाने नहीं है।

सीमेंट के लिए क्या जरूरी
जानकार बताते है कि सीमेंट के लिए 35 प्रतिशत कोयले की राख और 65 प्रतिशत लाइम की जरूरत रहती है। इन दोनों के सम्मिश्रण से ही सीमेंट बनता है। जहां तक लाइम का प्रश्न है तो निकटवर्ती जैसलमेर जिले के सोनू में भरपूर लाइम स्टोन है। प्रतिदिन जैसलमेर से दो मालगाड़ी भरकर लाइम निर्यात होता है, जो हजारों मेट्रिक टन है। एेसेे में ये देानों जिले ही सीमेंट बनाने में सक्षम है।

क्यों नहीं हो रहा है यहां सीमेंट उद्योग
सीमेंट उद्योग के लिए परिवहन की सुविधा के लिए रेल चाहिए। यह कहकर बाड़मेर और जैसलमेर में सीमेंट उद्योग नहीं लगाया जा रहा कि यहां से परिवहन कैसे होगा? जबकि बाड़मेर तक रेलवे लाइन है। जैसलमेर- बाड़मेर-कांडला रेलवे लाइन का सर्वे किया जा चुका है। इस पर सरकार ने काम किया होता तो अब तक बाड़मेर में सीमेंट कारखानों की प्रबल संभावना बन जाती।

लग सकता है बड़ा प्लांट
लिग्नाइट पॉवर प्लांट की अभी 1080 मेगावाट की इकाइयां भादरेस में कार्यरत है। 660 मेगावाट की इकाइयां प्रस्तावित है। 250 मेगावाट की गिरल लिग्नाइट इकाइयां बंद पड़ी है। सभी इकाइयां संचालित होना शुरू हों तो यहां कोयले की राख इतनी होंगी कि सीमेंट का बड़ा प्लांट बाड़मेर में लग सकता है। 3500 टन राख प्रतिदिन बनती है प्लांट में, 20 हजार मैट्रिक टन लाइम स्टोन का प्रतिदिन जैसलमेर से होता है निर्यात

सरकार ध्यान दें तो बन सकता है
- सरकार ध्यान दें तो सीमेंट उद्योग बाड़मेर या जैसलमेर दोनों में से एक जगह स्थापित हो सकता है। बाड़मेर में कोयले की राख है और जैसलमेर में लाइम स्टोन। अब केवल परिवहन का मसला है तो परिवहन तो दोनों का ही हो रहा है। यह उद्योग लगे तो यहां के लोगों को बड़ा फायदा हो सकता है।- हेमंत सिंघल, सेवानिवृत्त प्रबंधक, गिरल पॉवर प्लांट

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