
रतन दवे/ बाड़मेर। राज्य के नए जिले बालोतरा में लंबे समय से सिवाना की पहाडिय़ों में दुर्लभ खनिज की खोज की प्रमाणिकता सिद्ध हो गई है। 1 लाख 11 हजार 845 टन दुर्लभ खनिज मौजूद है। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग ने इसकी ताईद की है। राज्य में 35 दुर्लभ खनिज परियोजनाएं और 195 खोज परियोजनाओं में अब बालोतरा के सिवाना इलाका शामिल है। चीन की मॉनोपोली तोड़ने वाले इन खनिजों पर अब अन्वेषण से आगे तक परमाणु ऊर्जा विभाग कार्य कर रहा है।
बाड़मेर जिले के सिवाना में रेअर अर्थ का बड़ा खजाना होने के संकेत एक दशक पहले ही मिले थे। परमाणु ऊर्जा विभाग ने वर्ष 2021-22 से इस पर कार्य प्रारंभ किया। इसमें जी-4(प्रारंभिक अन्वेषण) और जी-3(संसाधन जुटाने के आगामी स्तर) तक कार्य चल रहा है।
खजाने की पुष्टि
जयपुर ग्रामीण के सांसद राव राजेन्द्रसिंह ने कोयला मंत्री से संसद में जानकारी चाही। इस पर कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने जवाब में बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने राजस्थान के बालोतरा जिले के कुछ हिस्से में कठोर चट्टानी इलाके में 1 लाख 11 हजार 845 टन दुर्लभ मृदा तत्व ऑक्साइड(आरईओ) की खोज की है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत इस पर कार्य हो रहा है।सामरिक और महत्वपूर्ण खनिजों की क्षमता को लेकर अभी राज्य में 35 परियोजनाएं और 195 अन्वेषण का कार्य चल रहा है।
अभी यहां से कर रहे आयात
चीन की दुर्लभ धातु पर मॉनोपोली है। भारत चीन से 700 टन के करीब आयात हर साल कर रहा है। इसके अलावा हांगकांग, जापान, अमेरिका, इंग्लैण्ड, स्वीडन, सिंगापुर, स्वीडन मंगोलिया से कम मात्रा में आयात कर रहा है। भारत का कुल आयात 1185 टन है।
बालोतरा में यहां चल रहा अन्वेषण
सेंजी की बेरी मेली, इंद्राणा सिवाना, सुकलेश्वर मंदिर, निमाड़े की पहाड़ी दंताला, कुंडल-धीरा, मवड़ी, सिलोर दंताला, कालूड़ी, टापरा, गुड़ानाल, बाछड़ाऊ(धोरीमन्ना),गूंगरोट, रेलों की ढाणी तेलवाड़ा सहित अन्य इलाकों में है।
Updated on:
03 Apr 2025 03:11 pm
Published on:
03 Apr 2025 12:33 pm
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