
After 70 years in last village Akali in Border, dream is real
बाड़मेर. भारत-पाक सीमा पर अंतिम गांव अकली में 70 वर्षों बाद पनिहारिनों और ग्रामीणों के अपने गांव में पानी का सपना साकार हो गया। अब पीने का पानी के लिए नहीं करना पड़ेगा घंटों पानी का इंतजार, ट्यूबवेल से मिलेगा 24 घण्टे पानी। दूर से पानी लाने की मजबूरी में बालिकाओं की शिक्षा बीच में छूट जाती थी। अब उनके उच्च अध्ययन को लग सकेंगे पंख।
गांव अकली में पिछले 70 सालों से पीने के पानी के लिए परंपरागत जलस्रोत बेरियों पर ही निर्भर रहना पड़ता था।
महिलाएं व बालिकाएं पूरे दिन बेरियों से पानी लाने का ही काम करते थी। कई बार प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन समाधान नहीं मिला!
पत्रिका ने अकली गांव की पीड़ा को समझा और सिलसिलेवार समाचार अभियान चलाया। ग्रामीणों की पीड़ा जिले के प्रभारी मंत्री बीडी कल्ला तक पहुंची। उन्होंने तुरंत ट्यूबवैल स्वीकृत किया। इस बीच विभागों के तालमेल के अभाव में काफी दिनों तक ट्यूबवैल का बिजली कनेक्शन नहीं हुआ।
पत्रिका ने लगातार ग्रामीणों की पानी की समस्या को ध्यान में रखते इस मसले से जुड़ी छोटी से छोटी बात को मुहीम के रूप में उठाया। जिसके बाद जलदाय और डिस्कॉम के अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए कार्य किया और अकली में पानी की धारा शुक्रवार को बह निकली।
ग्रामीणों की खुशी इतनी थी कि शुक्रवार रात्रि विधिवत जागरण का आयोजन कर सुबह मुंह मीठा कराते हुए खुशी का इजहार किया। राजस्थान पत्रिका का ग्रामीणों ने हृदय से आभार जताया।
Published on:
11 May 2019 01:28 pm
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