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‘मैं 3 पीढ़ियों से बालोतरा में रह रहा हूं, फिर भी मेरे खिलाफ आपत्ति दर्ज’, SIR को लेकर छलका यूसुफ और मोईनुद्दीन का दर्द

बालोतरा जिले के पचपदरा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक ही दिन में 50-100 मतदाताओं के नाम काटने के लिए फर्जी फॉर्म-7 जमा हुए, जिनमें अधिकांश में श्रीगंगानगर जिले में शिफ्ट होना दर्शाया गया।

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Big Scam in SIR

Big Scam in SIR (Patrika Photo)

बालोतरा: मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बालोतरा जिले के पचपदरा विधानसभा क्षेत्र में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। मतदाताओं के नाम हटाने के लिए हजारों फर्जी फॉर्म नंबर-7 जमा किए गए, जिनमें अधिकांश में कारण के रूप में श्रीगंगानगर शिफ्ट होना दर्शाया गया है, जबकि संबंधित मतदाता अपने मूल निवास स्थान पर ही रह रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका की जांच में सामने आया कि पचपदरा विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों पर बीएलए-2 के नाम से फर्जी हस्ताक्षरों अथवा बिना हस्ताक्षर के एक ही दिन में 50 से 100 मतदाताओं के नाम काटने के लिए आवेदन भर दिए। फर्जीवाड़े के स्पष्ट प्रमाण मिलने के बाद प्रशासन ने कई आवेदन खारिज भी किए हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में आपत्तियों का सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फॉर्म-7 पर उठे सवाल

जांच में सामने आया कि फॉर्म नंबर-7 में की गई करीब 90 प्रतिशत आपत्तियों में श्रीगंगानगर शिफ्ट होना ही कारण बताया गया। बालोतरा के वार्ड नंबर-15 में 71 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए। इनमें जिन व्यक्तियों के नाम से आपत्तियां दर्ज करवाई गई, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है।

फॉर्म नंबर-7 में अर्जुनदास के नाम से आपत्ति दर्ज कराने की बात सामने आई है, लेकिन अर्जुनदास ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं करवाई है। वहीं, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार कोई भी बीएलए-2 एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन जमा कर सकता है, लेकिन पचपदरा विधानसभा क्षेत्र में एक ही दिन में 100 से 200 आवेदन जमा किए गए, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

जानकारी के अनुसार, कई बीएलए-2 के नाम से आवेदन भरे गए, जबकि संबंधित बीएलए-2 ने स्वीकार किया कि उन्होंने ऐसे कोई आवेदन नहीं भरे और उनके हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी फर्जी आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं।
सिणली-चौसीरा के आकूब खान ने बताया कि हमारे गांव के 37 लोगों के खिलाफ फर्जी आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं, जबकि हम सभी कई पीढ़ियों से यहीं निवास कर रहे हैं। अब हमें श्रीगंगानगर का निवासी बताया जा रहा है। इस संबंध में मैंने जसोल थाने में फर्जी आपत्ति दर्ज करवाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

फर्जी आपत्तियों से मतदाता परेशान

पिछले तीन पीढ़ियों से बालोतरा में रह रहा हूं। मेरा मकान, रोजगार और पूरा जीवन यहीं से जुड़ा है। मेरा नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में था और 2025 की सूची में भी है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत बीएलओ की ओर से मेरा सत्यापन होने के बावजूद मेरे खिलाफ आपत्ति दर्ज करवा दी गई। यह बेहद परेशान करने वाला है।
-मोहम्मद यूसुफ, मतदाता वार्ड संख्या 15, बालोतरा

मैं लंबे समय से बालोतरा का निवासी हूं और यहां मकान भी है। सांसद, विधायक और पार्षद चुनावों में हमेशा बालोतरा से ही मतदान किया है। इसके बावजूद आपत्ति में मुझे श्रीगंगानगर का निवासी बताया जा रहा है। बिना किसी कारण के हमें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
-मोहम्मद मोईनुद्दीन, मतदाता वार्ड संख्या 15, बालोतरा

क्षेत्र में भाग संख्या 200 में 13, भाग संख्या 201 में 10 और भाग संख्या 204 में 20 सहित कुल 43 आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं। इनमें से कई आपत्तियां बिना हस्ताक्षर के दर्ज होने से फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई है। पीड़ित मतदाताओं ने फर्जी आपत्ति दर्ज करवाने वालों के खिलाफ थाने में मुकदमे दर्ज करवाए हैं।
-रमेश पटेल, मतदाता ग्राम पंचायत पारलू

उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए

इतनी बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन जमा होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फर्जी आवेदन देने वालों, फर्जी हस्ताक्षर करने वालों और इसमें संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-मदन प्रजापत, पूर्व विधायक पचपदरा

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