
बाड़मेर जिले में पौधरोपण को लेकर एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पत्रिका के हरयाळो राजस्थान की पे्ररणा लगातार पौधरोपण को प्रेरित कर रही है। नतीजा अब लोग नित नए प्रयोग भी कर रहे हैं। शहर के तिलक बस स्टैंड के भीतर बने मंदिर परिसर में आम, पपीता, केला और बादाम के पौधे लगाए गए। आम का पौधा पेड़ बन गया और अब इस पर आम लग गए हैं। एक पूर्व सांसद ने तीस साल पहले चुनावी वादे में यहां आम के पेड़ और अंगूर की बेलें लगाने का कहा था तो लोगों ने इसे हास्य-विनोद समझा था लेकिन अब यह हकीकत हो गया है।

बाड़मेर जिले में पौधरोपण को लेकर एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पत्रिका के हरयाळो राजस्थान की पे्ररणा लगातार पौधरोपण को प्रेरित कर रही है। नतीजा अब लोग नित नए प्रयोग भी कर रहे हैं। शहर के तिलक बस स्टैंड के भीतर बने मंदिर परिसर में आम, पपीता, केला और बादाम के पौधे लगाए गए। आम का पौधा पेड़ बन गया और अब इस पर आम लग गए हैं। एक पूर्व सांसद ने तीस साल पहले चुनावी वादे में यहां आम के पेड़ और अंगूर की बेलें लगाने का कहा था तो लोगों ने इसे हास्य-विनोद समझा था लेकिन अब यह हकीकत हो गया है।

बाड़मेर जिले में पौधरोपण को लेकर एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पत्रिका के हरयाळो राजस्थान की पे्ररणा लगातार पौधरोपण को प्रेरित कर रही है। नतीजा अब लोग नित नए प्रयोग भी कर रहे हैं। शहर के तिलक बस स्टैंड के भीतर बने मंदिर परिसर में आम, पपीता, केला और बादाम के पौधे लगाए गए। आम का पौधा पेड़ बन गया और अब इस पर आम लग गए हैं। एक पूर्व सांसद ने तीस साल पहले चुनावी वादे में यहां आम के पेड़ और अंगूर की बेलें लगाने का कहा था तो लोगों ने इसे हास्य-विनोद समझा था लेकिन अब यह हकीकत हो गया है।

बाड़मेर जिले में पौधरोपण को लेकर एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पत्रिका के हरयाळो राजस्थान की पे्ररणा लगातार पौधरोपण को प्रेरित कर रही है। नतीजा अब लोग नित नए प्रयोग भी कर रहे हैं। शहर के तिलक बस स्टैंड के भीतर बने मंदिर परिसर में आम, पपीता, केला और बादाम के पौधे लगाए गए। आम का पौधा पेड़ बन गया और अब इस पर आम लग गए हैं। एक पूर्व सांसद ने तीस साल पहले चुनावी वादे में यहां आम के पेड़ और अंगूर की बेलें लगाने का कहा था तो लोगों ने इसे हास्य-विनोद समझा था लेकिन अब यह हकीकत हो गया है।

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