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बाड़मेर में है साउथ इंडस्ट्री की फिल्म का रीयल हीरो, साहसिक कार्य पर मिला था राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड, पढिए पूरी खबर

सोशल प्राइड :- बाड़मेर के कवास के निवासी है डीजीपी सांगाराम, तमिलनाडु पुलिस में अभी चैन्नई डीजीपी पद पर नियुक्त  

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DGP Sangaram

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बाड़मेर. भरतपुर की कुख्यात ओमा बावरिया गैंग का सफाया करने वाले जांबाज पुलिस अधिकारी सांगाराम पर दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री ने फिल्म बनाई है। यह फिल्म भरतपुर की कुख्यात बावरिया गैंग खात्मे की रीयल स्टोरी पर आधारित है। 'धीरनÓ नाम से बनी फिल्म 17 नवम्बर को रिलीज हुई है।

वर्ष 1995 से 2005 तक तमिलनाडु सहित प्रदेश के पांच राज्यों राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरप्रदेश में आतंक का पर्याय बनी ओमा बावरिया गैंग को खत्म करने वाले पुलिस अधिकारी और अब चैन्नई पुलिस डीजीपी सांगाराम जांगिड़ ने गैंग का सफाया किया था। सांगाराम बाड़मेर जिले के कवास गांव के निवासी है।

साल 1995-2005 के बीच बावरिया गैंग ने 24 हत्याएं और हाईवे पर लूट की कई वारदातों को अंजमा दिया था। इस गैंग को खत्म करने का जिम्मा आईपीएस सांगााराम जांगिड़ को मिला था। जांगिड़ के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में गैंग के 13 सदस्य मारे गए थे और पुलिस ने दो एंकाउंटर भी किए। बावरिया गैंग खत्म करने के साहसिक कार्य के लिए सांगाराम को राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड प्रदान किया गया। इस साहसिक कार्रवाई पर दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री की ओर से बनाई गई फिल्म तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व तेलंगाना में प्रदर्शित हुई है। इस फिल्म को हिन्दी में डब किया जाएगा और अलग नाम से रिलीज की जाएगी।

राजस्थान में हुई शूटिंग
- ओमा बावरिया की गैंग भरतपुर रूपावास से जुड़ी थी। इसके कारण फिल्म का फिल्मांकन भी भरतपुर, बाड़मेर व जैसलमेर में हुआ है।

रीयल हीरो की जुबानी
यह घटनाक्रम 1995 से 2005 के बीच का है। यहां एक विधायक की हत्या हो गई थी। उस समय तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश सहित पांच राज्यों में कई हत्याएं हुई। मुझे इस केस की जिम्मेदारी मिली। जांच के दौरान हमें एक राजस्थानी जूती मिली। इसे देखते ही मुझे अंदाजा हो गया कि यह मामला कहां से ट्रेस हो सकता है। फिर इस मामले को लेकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान में तलाश करते रहे। भरतपुर के रूपावास में लक्ष्मण बावरिया ट्रेस हुआ और इसके बाद आगरा जेल में ओमा बावरिया। फिर एक-एक कर गैंग के सदस्य पकड़ में आते गए। दो कुख्यात अपराधियों का एनकाउंटर मैने मेरठ के पास किया था। तेरह को गिरफ्तार किया गया। इसमें से दो को फांसी और ग्यारह को उम्रकैद हुई। इस कार्य पर राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड मिला। साउथ की इंडस्ट्री ने इस पर फिल्म बनाई है। जिसका तमिल में नाम धीरन और तेलगु में खाकी रखा है।- सांगाराम जांगिड़, डीजीपी चैन्नई पुलिस