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परिचालक कम, बसें ज्यादा, संचालन की मशक्कत

-115 परिचालकों की डिपो की जरूरत-77 के भरोसे दौड़ रही है 66 बसें-परिचालकों को छुट्टी देने में मुश्किल
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परिचालक कम, बसें ज्यादा, संचालन की मशक्कत

परिचालक कम, बसें ज्यादा, संचालन की मशक्कत

बाड़मेर. स्थानीय रोडवेज डिपो परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। कई परिचालक लम्बे रूट पर रोजाना ही चल रहे हैं। ऐसे में उनको रेस्ट भी नहीं मिल पाती है। बसें अधिक और परिचालक कम होने के कारण अवकाश देना मशक्कत भरा हो गया है।
बाड़मेर डिपो को बसों के संचालन अनुसार वर्तमान में 115 कंडक्डर्स की आवश्यकता है। लेकिन डिपो के पास 77 परिचालक ही है। इसके कारण बसों के संचालन को लेकर भारी समस्या हो रही है। परिचालकों को लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है।
इसलिए होती है परिचालकों की कमी
रोडवेज में निगम की बसों की संख्या कम और अनुबंधित की ज्यादा है। अनुबंधित बसों की देखरेख और चालक रोडवेज का नहीं होता है। लेकिन बसों में चलने वाले कंडक्टर रोडवेज के होते हैं। ऐसे में परिचालकों को इन बसों में भी प्रबंधन को लगाना पड़ता है। इसके कारण परिचालकों की कमी हो जाती है।
डिपो की 66 बसें दौड़ रही
स्थानीय डिपो से प्रतिदिन 66 बसों का संचालन चल रहा है। ऐसे में जितने परिचालक अभी है, वो काफी कम है। कंडक्टर्स को जरूरत के वक्त कई बार छुट्टी नहीं मिल पाती है। कई परिचालक तो लम्बे रूट पर भी बिना रेस्ट के चलते हैं। प्रबंधन के पास कंडक्टर नहीं होने से वह भी उसी परिचालक पर निर्भर करता है। कंडक्टर छुट्टी पर चला जाए तो बस संचालन नहीं होने का खतरा बन जाता है।
परिचालकों की कमी है
अभी डिपो के पास 77 कंडक्टर है। लेकिन जरूरत 115 परिचालकों की है। इसके कारण संचालन काफी मुश्किल होता है। फिर भी कोशिश करते है कि बसों का संचालन नियमित रूप से बेहतर तरीके से हो, जिससे यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हो।
उमेश नागर, मुख्य प्रबंधक बाड़मेर आगार

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