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BARMER#शुक्रिया मानसून: रेगिस्तान को ओढ़ा दी धानी चुनर

शुक्रिया मानसून: रेगिस्तान को ओढ़ा दी धानी चुनरबाड़मेर. रेगिस्तान...रेत का समंदर। चांदी सी चमकती रेत के धोरों के लिए जाना जाता है लेकिन जब सावन-भाद्रपद में यहां मानसून की मेहरबानी होती है तो पूरा कैनवास ही बदल जाता है। धोरों पर हरियाली और खेतों में धानी चुनर ओढ़ ली जाती है। मानसून के विदा होते-होते तो यह आलम हुआ है कि पहले कभी कोई इन धोरों में आया है तो उसको सहसा विश्वास ही नहंीं होता कि यह वही जगह है।

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शुक्रिया मानसून: रेगिस्तान को ओढ़ा दी धानी चुनर
बाड़मेर. रेगिस्तान…रेत का समंदर। चांदी सी चमकती रेत के धोरों के लिए जाना जाता है लेकिन जब सावन-भाद्रपद में यहां मानसून की मेहरबानी होती है तो पूरा कैनवास ही बदल जाता है। धोरों पर हरियाली और खेतों में धानी चुनर ओढ़ ली जाती है। मानसून के विदा होते-होते तो यह आलम हुआ है कि पहले कभी कोई इन धोरों में आया है तो उसको सहसा विश्वास ही नहंीं होता कि यह वही जगह है। बाड़मेर के ऐतिहासिक किराडू के मंदिर के आसपास के धोरे व पहाड़ इन दिनों इसी हरियाली से घिरे है। ऐसे लगता है कि इस हरियाली के साथ कोना-कोना महक गया है। शुक्रिया मानसून..इस बार खूब बरसे।

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