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BARMER#यहां श्मशान की राह भी आसान नहीं

यहां रोज मर-मर के जी रहे है लोगबाड़मेर। कहते है कि इस रास्ते एक दिन सब को जाना है। लेकिन यहां पर यह राह आसान नहीं है। मरने के बाद व्यक्ति को स्वर्ग मिले या नहीं मिले। लेकिन यहां मरने व जीने वाले दोनों को इसी गंदगी में से गुजरना पड़ रहा है। यहां के लोगों के लिए यह रास्ता आना-जाने का मुख्य रास्ता है।

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BARMER#यहां श्मशान की राह भी आसान नहीं
यहां रोज मर-मर के जी रहे है लोग
बाड़मेर। कहते है कि इस रास्ते एक दिन सब को जाना है। लेकिन यहां पर यह राह आसान नहीं है। मरने के बाद व्यक्ति को स्वर्ग मिले या नहीं मिले। लेकिन यहां मरने व जीने वाले दोनों को इसी गंदगी में से गुजरना पड़ रहा है। यहां के लोगों के लिए यह रास्ता आना-जाने का मुख्य रास्ता है। जहां पर महीनों से शहर का गंदा पानी जमा है। यह गांव कुडला शहर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर है। जहां पर प्रशासन को पहुंचने के लिए कुछ मिनट लगेगें। लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं उडी है। यहां के फोटो व विडियो खुद ही बोल रहे है कि यहां के हालात क्या है। अब तो जाग जाओ प्रशासन…
बाड़मेर के कुडला गांव में सोमवार को खेत में काम कर रहे कृषक रामसिंह की मौत तबीयत बिगडऩे से हो गई। जिसकी शव यात्रा गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इन लोगों को राम सिंह के शव को गंदे पानी में से लेकर जाना पड़ा। इस समस्या से गांव वासियों ने कई बार प्रशासन को अवगत करवाया। लेकिन प्रशासन के कान पर जूं भी नहीं रेंगी।

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