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हवा और आंधी टिड्डी की मददगार, बाड़मेर के साथ अन्य जिलों में फैलाव

-पाक में चल रही है आंधी, इसलिए बाड़मेर जल्दी आ गई टिड्डी-अब थार में भी तेज हवा और आंधी दे रही टिड्डी का साथ-अंडे नहीं देती है ये टिड्डी, लेकिन एक जगह ठहराव का समय कम-टीम पहुंचने से पहले ही अगले पड़ाव की ओर टिड्डी दल

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हवा और आंधी टिड्डी की मददगार, बाड़मेर के साथ अन्य जिलों में फैलाव

हवा और आंधी टिड्डी की मददगार, बाड़मेर के साथ अन्य जिलों में फैलाव

बाड़मेर. मौसम में आया बदलाव टिड्डी के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। तेज हवा और आंधी के कारण टिड्डी को फैलने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध करवा रहा है। हवा के साथ टिड्डी सीमावर्ती क्षेत्रों से अन्य जिलों में भी पहुंच गई, जहां बहुत कम संख्या में सितम्बर-अक्टूबर तक पहुंचती थी। लेकिन इस बार अप्रेल-मई में अन्य जिलों में टिड्डी का भारी हमला हो चुका है।
जानकारों के अनुसार पाक में आंधी चलने से टिड्डी इस बार जल्द सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंच गई। टिड्डी पाक में पहले ही पनप चुकी थी। इसलिए जैसे ही तेज हवा और आंधी चली और रुख सीमावर्ती क्षेत्र की तरफ रहा। ऐसे में टिड्डी का खतरा बढ़ता चला गया। इसके बाद तो लगातार टिड्डी आ रही है।
सर्वे में कुछ नहीं मिला और दो दिन बाद में आ धमकी
बाड़मेर में टिड्डी नियंत्रण संगठन ने 20 अप्रेल से सर्वे शुरू किया। सामान्यत: सीमावर्ती क्षेत्र में पाक की ओर से टिड्डी मई में ही आती है। विभाग भी टिड्डी का हमला मई से नवम्बर तक मानता रहा है। इसलिए अप्रेल में सर्वे शुरू कर दिया जाता है। हमेशा की तरह सर्वे शुरू हुआ, टिड्डी नहीं दिखी। लेकिन अचानक 20 अप्रेल के दो दिन बड़े दल का हमला हो गया। इससे विभाग भी अचंभित है कि इस बार टिड्डी कैसे आ पहुंची।
अंडे नहीं देती, इसलिए खतरा कम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिड्डी अंडे नहीं देती है। इसलिए खतरा कम है। नियंत्रण में जरूर बाधा आ रही है क्योंकि यह टिड्डी बहुत जल्दी उड़ती है और नुकसान भी अधिक कर देती है। लेकिन अंडे नहीं देने के कारण अगर नियंत्रित हो जाए तो नुकसान से बचा जा सकता है।
टिड्डी का आना जारी है
टिड्डी का आना जारी है। टीमों को अलग-अलग स्थानों पर भेजा जा रहा है। यह टिड्डी अंडे नहीं देती है, इसलिए नियंत्रण जल्द जरूरी है। दल काफी बड़े आ रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि नियंत्रण जल्दी से हो जाए। एक-दो बार तो ऐसा भी हुआ कि टिड्डी की सूचना मिली टीम जब तक पहुंची तब तक दल अन्य स्थान तक पहुंच गया। ऐसे में परेशानी हो रही है।
केवी चौधरी, संरक्षण अधिकारी, टिड्डी नियंत्रण संगठन बाड़मेर

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