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भगवान को भक्त सबसे प्रिय, पुकार पर दौड़े आते हैं

संसार में धर्म की हानि होने पर भगवान अवतार लेते हैं। अधर्मी लोगों का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं।

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Bring ideals of Lord Rama into your life

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बालोतरा. संसार में धर्म की हानि होने पर भगवान अवतार लेते हैं। अधर्मी लोगों का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान को भक्त से प्रिय कोई और वस्तु नहीं होती है। भक्तों की पुकार पर वे उनकी रक्षा के लिए दौड़े आते हैं।

नगर के वृंदावन बगेची में संत हरिदास महाराज, संत रामदास महाराज की स्मृति में जागसा श्रीराम समिति की ओर से आयोजित भागवत कथा का वाचन करते हुए कृष्णा प्रिया ने यह बात कही।

कथा वाचक ने कहा कि धर्म ही सृष्टि का आधार है। धर्म और पुण्य से ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। धर्म प्रदर्शन के लिए नहीं, आचरण के लिए है। धर्म उपदेश के लिए नहीं जीवन में उतारने के लिए है। भगवान राम के आदर्शों को जीवन में उतारें। प्राणी मात्र की सेवा करें।

उन्होंने कुम्भकर्ण, विभीषण जन्म,वरदान , लंका में प्रवेश आदि प्रसंगों पर प्रकाश डाला। भजनों पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए नृत्य किया। जागसा भोलाराम आश्रम महंत सियावरदास, वृंदावनदास के सान्निध्य में आयोजित कथा में शहर, क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर सभापति सुमित्रा जैन, पार्षद हीरालाल गोयल, जयराम सिंघल, भंवरलाल टावरी, चंद्रप्रकाश सिंघल, अशोक रंगवाला , भरत सिंघल, प्रमोद गोयल , मोहनलाल सिंहल, श्रवण सिंघल मौजूद थे।

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राष्ट्रहित व मानवीय कार्य सर्वोपरि

- स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित

बालोतरा. सिवाना आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय पूर्व छात्र परिषद की ओर से स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता भगवतदान रतनू ने कहा कि संस्कार, अनुशासन, राष्ट्र प्रेम के गुण आज भी हमारी पहचान है। राष्ट्रहित व मानवीय कार्य सर्वोपरि है।

कार्यक्रम अध्यक्ष जीवराज वर्मा ने कहा कि विद्या व लक्ष्य प्राप्ति के बाद विद्यालय विकास में पूर्व छात्र अपना अहम योगदान दें। इससे की दूसरे छात्रों को भी प्रेरणा मिले।

संचालन व संयोजक उद्यमसिंह चौहान व कोष प्रमुख नीरज जांगिड़ ने परिचय करवाया। पूर्व छात्र महिपालसिंह राजपुरोहित, हरिसिंह करनोत, महावीर बोस ने विचार व्यक्त किए। सह संयोजक अरुण सोनी ने आभार ज्ञापित किया। समिति कोष प्रमुख खंगारराम बोस, प्र्रधानाचार्य अजयसिंह कुसीप, जोगसिंह परमार, गोदाराम, ओमप्रकाश विराच उपस्थित थे।