
Chunaram, 4 km walking to going for school, now ISRO scientists
बायतु (बाड़मेर).अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए रोजाना 4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने वाले चूनाराम जाट का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में बतौर वैज्ञानिक हुआ है। उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर 12वीं रैंक हासिल कर सीमावर्ती बाड़मेर जिले का नाम रोशन किया। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े चूनाराम के पिता भोलाराम धतरवाल पेशे से किसान हैं, जो स्वयं 8वीं कक्षा तक पढ़े हुए हैं। उसकी माता रामूदेवी गृहिणी हैं, जो अनपढ़ हैं। चूनाराम की प्रारम्भिक शिक्षा ढाणी से करीब 4 किमी दूर स्थित राउप्रावि नरेवा बेरा खट्टु में हुई। 8वीं के बाद वर्ष 2008 में नवोदय विद्यालय पचपदरा में चयन हो गया। वर्ष 2012 मे 12वीं में टॉप रैंक हासिल कर विद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट बने। इसी साल चूनाराम का चयन एनआईआईटी सूरत में हो गया। वहां 4 साल का कोर्स करने के साथ अपनी तैयारी जारी रखी और अब इसरो में चयन हुआ है।
बड़े भाई ने पढ़ाई छोड़ दिया आर्थिक संबल
किसान परिवार में जन्मे चूनाराम की आर्थिक स्थिति शुरू से ही कमजोर रही। खेती पर निर्भरता के कारण परिवार का पालन-पोषण मुश्किल हुआ तो पिता ने दिहाड़ी मजदूरी भी की। बड़े भाई किशन कुमार ने पढ़ाई बीच में छोड़ बालोतरा में कपड़े की फैक्ट्रियों में जाकर काम शुरू किया, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरे और चूनाराम पढ़ सके। बड़े भाई ने कड़ी मेहनत कर चूनाराम की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ ही हर समय आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। अब उनकी मेहनत भी रंग लाई।
चिमनी की रोशनी में की पढ़ाई
चूनाराम की ढाणी में आज भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। उन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई गांव में ही की। इस दौरान उन्होंने चिमनी की रोशनी में पढ़ाई की।
थार का बढ़ाया मान
इसरो केन्द्रीय रिक्रूटमेंट बोर्ड-2017 की ओर से वैज्ञानिकों के 35 पदों के लिए यह परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें चूनाराम ने 12वां स्थान हासिल का थार का नाम रोशन किया। परीक्षा में प्रथम स्थान पर सुन्दर शर्मा व द्वितीय कंवलजोतसिंह संधु रहे।
Published on:
15 Mar 2018 11:03 am
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