
एक के भरोसे पूरा स्कू ल, कैसे बेहतर हो अंग्रेजी शिक्षा
दिलीप दवे बाड़मेर. एक तरफ जहां सरकार अंग्रेजी मीडियम स्कू ल खोल अंग्रेजी को बढ़ावा दे रही है तो दूसरी ओर हिंदी माध्यम के विद्यालयों में अंग्रेजी का बुरा हश्र है। बारह कक्षाओं में अंग्रेजी पढ़ाने वाला शिक्षक मात्र एक ही है। यह स्थिति करीब पचास विद्यालयों की है। एेसे में अंग्रेजी का स्तर सुधरे भी तो कैसे? स्टाफिंग पैटर्न के चलते २०१५ के बाद राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ङ्क्षहदी व अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं कर वरिष्ठ अध्यापकों को ही ग्यारहवीं व बारहवीं को पढ़ाने को जिम्मा सौंपा गया।
दो साल बाद समीक्षा होनी थी लेकिन छह साल बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। एेसे में प्रदेश के नौ हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य हिंदी व अंग्रेजी के व्याख्याता नहीं है। इनमें से भी चार हजार विद्यालय एेसे हैं जहां अस्सी से अधिक नामांकन उक्त दोनों कक्षाओं में है।
स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार अस्सी से अधिक नामांकन ग्यारहवीं, बारहवीं का होने पर व्याख्याता का पद स्वीकृत होता है, लेकिन इन विद्यालयों में समीक्षा नहीं होने से पद स्वीकृत नहीं हुआ।
तीन स्तर के अंग्रेजी शिक्षक- वर्तमान में उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पहली से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही है। इनमें शिक्षक के लिए तीन स्तर के शिक्षक लगते हैं। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेेजी शिक्षक का कार्य तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल द्वितीय को होता है। वहीं, माध्यमिक स्तर पर वरिष्ठ अध्यापक विषय विशेषज्ञ होता है। वहीं, ग्यारहवीं व बारहवीं का शिक्षण व्याख्याता करवाते हैं। जिले में कई विद्यालय एेसे हैं जहां मात्र एक अंग्रेजी विशेष विशेषज्ञ ही शिक्षण कार्य करवा रहा है।
यहां सिर्फ वरिष्ठ अध्यापक के भरोसे सभी कक्षाएं- जैसार, रतासर, मिठडाऊ, खारिया तला, लुनाड़ा, सेवनियाला, लांपला, नेहरों की नाडी, गोहड़ तला, रामदेव मन्दिर, इशरोल, साकरिया तला, सोडियार, दीनगढ़, खुडाणी, तामलोर, लांबड़ा, खानियानी, रतरेड़ी, रेडाणा, गडरारोड, फोगेरा, खारची, खलीफे की बावड़ी, हरसाणी, रावतसर, भंवरिया, बावरवाला, हरपालिया, गंगासरा, मुकने का तला, खुमे की बेरी, कोलियाना, उडासर, लुखों का तला, धांधलावास, बाण्ड, मालपुरा, रतेऊ, पूनियों का तला, चिडिय़ा, कुम्पलिया, बानियावास, रिछोली, कालाथल, कोडूका, लाखेटा, सांवरड़ा सहित पचास विद्यालय एेसे हैं जहां सिर्फ वरिष्ठ अध्यापक ही कार्यरत हैं।
अंग्रेजी में पिछड़ रही ग्रामीण प्रतिभाएं- गांवों की प्रतिभाएं अंग्रेजी, हिंदी के व्याख्याता नहीं होने से पिछड़ रही है।
सरकार स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा कर उच्च माध्यमिक विद्यालयों में व्याख्याता सहित तीनों लेवल केअंग्रेजी विषय शिक्षकों की नियुक्ति करे।- भंवरसिंह आराबा, शिक्षक नेता
स्टाफिंग पैटर्न की हो समीक्षा- स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा होनी चाहिए। एक तरफ जहां सरकार अंग्रेजी को बढ़ावा दे रही है तो दूसरी ओर हिंदी माध्यम के विद्यालयों में अंग्रेजी विषय के अध्यापक ही नहीं है। सरकार समीक्षा कर अतिशीघ्र व्याख्याताओं की नियुक्ति करे।- कांतिलाल व्यास, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय बालोतरा
Published on:
18 Apr 2021 12:20 am
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