10 विधायकों के समर्थन से चल रही है गहलोत सरकार, प्रेसवार्ता में कार्यशैली पर उठाए सवाल
संवैधानिक रूप से सरकार इस्तीफा दे चुकी, मध्यावधि चुनाव के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हो- वासुदेव देवनानी
बाड़मेर. राजस्थान में 92 विधायकों के इस्तीफों के बाद राजस्थान में सरकार अल्पमत की हो गई है। इतिहास में पहली बार आलाकमान से बगावत के बाद राजस्थान में बगावत के मुख्यमंत्री शासन कर रहे हैं। यह बात पूर्व शिक्षामंत्री व अजमेर विधायक वासूदेव देवनानी ने शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
दस विधायकों का समर्थन प्राप्त सरकार को संवैधानिक रूप से निर्णय लेने का कोई हक नहीं है। फिर भी बड़ी संख्या में तबादले हो रहे हैं। दो भागों में विभाजित सरकार से जनता त्रस्त है। अशोक गहलोत व सचिन पायलट अलग-अलग दौरे कर रहे हैं। सरकार बनी तब भी बहुमत में नहीं थी। 6 बीएसपी के विधायकों को लेकर काम चलाया था।
राज्य में 27.6 प्रतिशत बेरोजगारी की दर
कानून व्यवस्था पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि राजस्थान में कोई कानून व्यवस्था नहीं है। महिला अत्याचार व बलात्कार में राज्य नम्बर एक पर है। यह सरकार बेरोजगारों को भत्ता व नौकरी का आश्वासन ही देती रही है। इससे बेरोजगारी की दर राज्य में 27.6 प्रतिशत हो गई है। देश की बेरोजगारी देर मात्र 6.7 प्रतिशत ही है। बिजली दर व वेट राजस्थान में सबसे अधिक है।
हिंदी की जगह अंग्रेजी माध्यम का बोर्ड ही लगा है। देवनानी ने कहा कि आज शिक्षा पर तालाबंदी हो रही है। शिक्षक है नहीं। इस सरकार ने पांच पोस्टों पर 20 शिक्षक लगा दिए और जहां 10 शिक्षकों की आवश्यकता है, वहां दो से काम चलाया जा रहा है। यह अग्रेंजी माध्यम स्कूलों पर वाहवाही लूट रहे हैं, जबकि अंग्रेजी माध्यम का एक भी स्कूल नहीं खोला गया। हिन्दी माध्यम स्कूल बंद कर केवल अंग्रेजी माध्यम का बोर्ड लगा दिया।
तबादलों को लेकर लेनदेन का आरोप
शिक्षा विभाग में एक लाख से अधिक शिक्षकों की कमी है। जिसकी पूर्ति करने के लिए भर्ती परीक्षाएं हो रही है। उसके पेपर लीक हो रहे हैं। डोटासरा केवल घोषणा करते थे और अब बीडी कल्ला की अधिकारी नहीं मानते हैं। लेनदेन के आधार पर केवल तबादले हो रहे हैं।
जलजीवन योजना पर काम करने की मंशा नहीं
जलजीवन योजना का उदाहरण देते हुए देवनानी ने कहा कि केन्द्र ने 26 हजार करोड रुपए राजस्थान को इस योजना के तहत दिए, लेकिन यह सरकार केवल चार हजार करोड़ ही खर्च कर पाई है। 22 हजार करोड़ सरकारी कोष में जमा है। इससे तो ऐसा लगता है कि सरकार की काम करने की मंशा ही नहीं है। राजस्थान में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। जंगल राज हो गया है। संवैधानिक रूप से यह सरकार इस्तीफा दे चुकी है। मध्यावधि चुनाव के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हों। हम बहुत जल्द राज्यपाल व विधानसभा अध्यक्ष से मिलने वाले हैं जिससे कि इनके इस्तीफे स्वीकार कर वस्तु स्थिति सामने लाई जाए।
मजबूत बूथ के आधार पर जीतेंगे चुनाव
2023 में विधानसभा चुनाव पर देवनानी ने कहा कि राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन को मजबूत बनाने में लगी हुई है। 52 में से लगभग 47 हजार बूथ समितियां बन चुकी है। हम अपने संगठन के ढांचे, प्रधानमंत्री मोदी की जनयोजना व वर्तमान राज्य सरकार की विफलताओं के आधार पर आगामी चुनाव लड़ेंगे।
प्रेस वार्ता में पूर्व यूआईटी चेयरमैन प्रियंका चौधरी, जिलाध्यक्ष आदूराम मेघवाल, जिला महामंत्री स्वरूप सिंह खारा, भाजपा जिला प्रवक्ता ललित बोथरा समेत कई भाजपाई मौजूद रहे।