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खुलेआम ठगा जा रहा उपभोक्ता,व्यापारी नहीं देते बिल,जानिए पूरी खबर

व्यापारी नहीं देते बिल, खुलेआम हो रही ठगी-व्यापारियों का तर्क-कोई बिल मांगता ही नहीं, फिर किसे दें विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस विशेष...

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Consumers , cheated openly,Traders do not give bill

Consumers being cheated openly, Traders do not give bill

बाड़मेर. शहर में उपभोक्ताओं के अधिकार पर दुकानदारों की मनमर्जी हावी है। हर जगह उभोक्ताओं को लूटा जा रहा है। इसमें उपभोक्ताओं का जागरूक नहीं होना भी कुछ हद तक जिम्मेदार है। वहीं, विभाग भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करता है।

पत्रिका टीम ने बुधवार को शहर में कई स्थानों पर स्टिंग के माध्यम से उपभोक्ताओं के ठगे जाने की जानकारी जुटाई। कई दुकानदार तो एमआरपी से डेढ़ गुना अधिक तक वसूलते नजर आए।
कीमत जरूर पूछी, बिल नहीं लिया

शहर के स्टेशन रोड स्थित एक दुकान पर दो महिलाएं पहुंची। उन्होंने करीब एक हजार रुपए का सामान खरीदा। यहां उन्होंने दुकानदार से कीमत की जानकारी जरूर जुटाई। सामान खरीदने के बाद दुकानदार ने भी बिल देना जरूरी नहीं समझा। महिलाएं भी दुकान पर जितने रुपए मांगे देकर रवाना हो गई। जब पत्रिका टीम ने महिलाओं से पूछा कि आपने बिल क्यों नहीं लिया? महिलाएं बोली इसी दुकान से से नियमित रूप से सामान लेकर जाते हैं। हमें दुकानदार पर भरोसा है। बिल कभी नहीं लेते है।
यहां पकड़ा दिया फर्जी बिल

स्टेशन रोड पर एक दुकान पर पत्रिका टीम ने 90 रुपए की खरीदारी की। जब उन्हें बिल का पूछा तो दुकानदार बोला- बिल का क्या करना है, लेकिन बिल मांगने पर दुकानदार ने फर्जी बिल बनाकर पकड़ा दिया। इस बिल पर न तो जीएसटी ने ही टिन नम्बर अंकित है। बिल पर क्रमांक भी उसी वक्त लिखे गए।

एमआरपी से ज्यादा वसूल रहे

शहर के रॉय कॉलोनी स्थित एक दुकान पर दूध की थैली खरीदी। इसकी एमआरपी 8 रुपए 50 पैसे थी, लेकिन दुकानदार ने दस रुपए मांग लिए। जब बिल देने की बात कहीं तो बोले- बिल हम किसी को देते नहीं है। यही हाल पानी की बोतल को लेकर रहा। शहर में अंधिकाश दुकानदार तय दर से पांच रुपए ज्यादा लेते मिले।

बिल मांगने पर देते नहीं, विवाद होता है

शहर कोतवाली थाने के सामने एक दुकान पर युवक पहुंचा। उसके साबुन खरीदे और पैसे देकर रवाना हो गया। जब उसे पत्रिका टीम ने बिल के बारे में पूछा तो बोला- बाजार में छोटी-मोटी वस्तु का बिल मिलता ही नहीं है। ऐसे में हम लेते नहीं है। वैसे भी मांगने पर कोई देता नहीं है। उल्टा विवाद की स्थिति हो जाती है।

विभाग मूकदर्शक

उपभोक्ताओं में जागरूकता का अभाव है। ऐसे में व्यापारी व दुकानदार उपभोक्ता पर हावी हो गए हंै। उपभोक्ताओं को बिना बिल व मनमानी दर का सामान खरीदना पड़ रहा है। यहां पर जिम्मेदार विभाग भी मूकदर्शक बना हुआ है।
एक दिन में कैसे होंगे जागरूक

प्रशासन की ओर से 15 मार्च को उपभोक्ता जागरूकता अधिकार दिवस मनाया जाता है। प्रदर्शनी, कार्यशाला के माध्यम से उपभोक्ता के अधिकार बता देंगे, लेकिन पूरे साल इस संबंंध में जागरूकता की बात नहीं की जाती है। एक दिन में जागरूकता कैसे लाई जा सकती है, यह सोचनीय है।