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संगीत के ज़रिए कोरोना जागरूकता बड़ी जिम्मेदारी

दो दिवसीय लोक कला जत्था प्रशिक्षण

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संगीत के ज़रिए कोरोना जागरूकता बड़ी जिम्मेदारी

संगीत के ज़रिए कोरोना जागरूकता बड़ी जिम्मेदारी


बाड़मेर. श्योर संस्था की ओर से यूनिसेफ के सहयोग से जिला यूवा कल्याण कोष समिति परिसर बाड़मेर में आयोजित दो दिवसीय लोक कला जत्था प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन कलाकारों को सम्बोधित करते पूर्व प्रोफेसर बंशीधर तातेड़ ने कहा कि संगीत के माध्यम से आमजन को जागरूक करने के साथ टीकाकरण करवाने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। इसे पूर्ण करने के लिए लोक कलाकार जत्थों को पूरी शिद्दत से निभानी होगी।

यूनिसेफ प्रतिनिधि ज़मीर अनवर ने कहा कि कोरोना अभी गया नहीं है दूनिया के अनेक देश आज भी इस महामारी से जूंझ रहे हैं। हमें कोरोना नियमों का पालन करना चाहिए। श्योर की संयुक्त सचिव लता कच्छवाहा ने कहा कि कलाकारों की जिम्मेदारी एक ऐसे वर्ग को जागरूक करना है जो टीकाकरण, दूसरे डोज़/बूस्टर डोज़ इत्यादि से वंचित है। श्योर के कोषाध्यक्ष नरेन्द्र तनसुखानी ने कहा कि लोक भाषा में संगीत के माध्यम से दिया गया संदेश आम आदमी को समझने में आसानी रहती है। लोक कला जत्थों के दल प्रभारी लालपुरी, संतोष कुमार, खेता खान, सावन खान, बसंत खान, अलवर खान, सवाई खान, ककुरबान खान आदि मौजूद रहे।

पद्मश्री अनवर खान बहिया का सम्मानकार्यक्रम के दौरान पद्मश्री अनवर खांन बहिया का शिक्षाविद बी.डी. तातेड़, संस्था के संयुक्त सचिव लता कच्छवाहा, नरेन्द्र तनसुखानी कोषाध्यक्ष आदि ने सम्मान किया। बहिया ने विचार व्यक्त किए।

पद्मश्री अनवर खांन बहिया ने बताया कि आज हम जिस स्थिती में है उस जगह पहुंचाने में पद्मश्री मगराज जैन का योगदान रहा है। उन्होनें यह भी बताया कि कलाकारों को हर तरह से सहयोग कर ख्याती दिलाने में जैन साहब का अहम भूमिका रही है।