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कोरोना की दस्तक ने बढ़ाई चिंता, लोगों के पहरे से नहीं खुला दरवाजा

- सीमांत जिले में कोरोना का नहीं रहा ज्यादा असर, जनता की जागरूकता आई काम- प्रशासन व पुलिस सख्ती, चिकित्सा विभाग रहा सजग

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कोरोना की दस्तक ने बढ़ाई चिंता, लोगों के पहरे से नहीं खुला दरवाजा

कोरोना की दस्तक ने बढ़ाई चिंता, लोगों के पहरे से नहीं खुला दरवाजा



बाड़मेर. जिले में कोरोना ने दस्तक जरूर दी, लेकिन स्थानीय बाशिंदों ने ऐसा पहरा लगाया कि दरवाजा ही नहीं खुला। यहीं कारण है कि तमाम चिंताओं के बीच बाड़मेर जिले में कोरोना नहीं फैल पाया। एक मामला पॉजिटिव आया, लेकिन इसके बाद सुकून भरे समाचार ही मिले। जो भी कोरोना टेस्ट गए, वे सब निगेटिव ही आए। ऐसे में मॉडिफाइ लॉक डाउन में बाड़मेर के शामिल होने की संभावना भी प्रबल है। वहीं, कोरोना की इस जंग में पुलिस व प्रशासन, चिकित्सा विभाग, शिक्षा महकमा, आंगनबाड़ी स्टाफ, होम गार्ड की भूमिका भी सराहनीय रही, जिसके चलते लोगों को ज्यादा चिंता नहीं रही।
बाड़मेर जिले में १७ हजार से अधिक बाहरी लोगों के आने के बीच कोरोना पॉजिटिव का खतरा बना हुआ था। गुजरात, महाराष्ट्र से चोरी-छिपे आने वाले यहां के निवासी दिहाड़ी मजदूरों ने सभी थारवासियों को चिंता में डाल दिया था। यह चिंता हर दिन बढ़ रही थी। इस बीच कितनोरिया गांव में प्रधानाचार्य जो जयपुर से आए, उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तो चिंता और बढ़ गई। ऐसा लगा कि अब थार में कोरोना कहर बरपाएगा, लेकिन जनता की जागरूकता ने ऐसा नहीं होने दिया। कितनोरिया के लोगों ने कफ्र्यू का पालन किया तो वहां के स्क्रीनिंग के नतीजे भी निगेटिव आए।
जनता ने ही कोरोना को रोका- अड़तीस हजार वर्ग किमी भूभाग, ६८९ ग्राम पंचायतें और करीब तीस लाख की आबादी वाले बाड़मेर शहर में ढाणियों में छितराई बस्ती के बीच प्रशासन व पुलिस चाहकर भी लॉक डाउन की पूर्ण पालना नहीं करवा सकते थे, लेकिन यहां की जागरूक जनता ने तय कर रखा था कि कोरोना को हराना है, इसलिए उन्होंने खुद को ही लॉक डाउन कर लिया। स्थिति यह रही कि सीमावर्ती गांव से लेकर ढाणी और शहर से लेकर कस्बे की गली और मोहल्ले हर दिन सूने-सूने नजर आए। लोगों ने जरूरत होने पर ही घर से बाहर निकलना मुनासिब समझा। खाद्य सामग्री और सब्जी की जरूरत होते हुए भी जैसे-तैसे कर काम चलाया, लेकिन मकसद एक ही रहा कि कोरोना को हराना है।
चिकित्सा महकमा सक्रिय, सभी का सहयोग- बाड़मेर में कोरोना की जंग में सबसे महत्ती भूमिका चिकित्सा महकमे की रही। संदिग्ध मरीजों की देखभाल में चिकित्सक च पैरा मेडिकल स्टाफ घर-परिवार को भूल बैठे तो एएनएम व ग्रामीण पैरा मेडिकल स्टाफ भी पीेछे नहीं रहा। ऊंट पर बैठकर भी होम आइसोलेशन मरीजों की देखभाल और सर्वे का जिम्मा बखूबी निभाया। वहीं, करीब नौ हजार शिक्षक कोरोना वॉरियर्स बने तो आंगनबाड़ी स्टाफ विशेषकर आशा सहयोगिनियों ने भी महत्ती भूमिका निभाई।
पुलिस व प्रशासन भी सक्रिय- जिले में कोरोना की जंग में पुलिस व प्रशासन का जिम्मा भी काबिले तारीफ रहा। शहर हो या फिर गांव। दूसरे जिलों से लगती सीमा हो या फिर चैकपोस्ट हर जगह पुलिस की निगरानी रही। वहीं, प्रशासनिक अमला भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता दिखा। होमगाड्र्स जवान भी पुलिस से किसी मामले में कम नहीं रहे। ऐसे में थार की धरा कोरोना की दस्तक के बाद दुविधा से दूर रही।