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सात समन्दर पार गूंज रही घुंघरुओं, झूमने लगते है जब नाचते है जसोल के गेरिए

होली विशेष -625 साल पुराना है जसोल का गेर नृत्य - युद्ध कौशल का प्रदर्शन करता है नृत्य

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Dance War is demonstrated skills

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बालोतरा. सिर से पांव तक लंबी आंगी-बांगी, पांवों में पहने हुए मोटे घुंघरू, हाथों में लंबे डांडिए, सैनिक की तरह सजे हुए नृतक, ढोल की आवाज और थाली की टंकार के साथ जोरदार धमक के साथ जमीन पर पड़ते पांव और उसके साथ मनमोहक मुद्रा में नाचते गेरिए। देखने वालों को झूमने पर मजबूर कर देते है।

एेसे लगता है युद्ध के मैदान में नृत्य हो रहा है। इनके साथ जब फाग का राग छिड़ता है तो होली की मस्ती के साथ शौर्य का नजारा दिखता है। इन गेरियों की यह अद्भुत मस्ती 625 साल पहले बाड़मेर जिले के जसोल गांव में शुरू हुई और अब फ्रांस, इटली, दक्षिणी अफिक्रा सहित अरब देशों में पहुंच चुकी है। अब तो विदेशों में यह गेरिए नाचते है तो गोरे-गोरियां इनके साथ झूमते नजर आते है।

छह शताब्दी से पुराना नृत्य-

मारवाड़ का प्रसिद्ध गेर नृत्य छह सौ वर्ष पुराना है। यह युद्ध का काल्पिक नृत्य है। जवान हाथों में तलवार नुमा लकड़ी के डांडिय़ा लेकर व पीठ पर ढाल बांध कर एक युद्ध में जिस प्रकार सैनिक एक से दूसरे पर तलवार से वार करते हैं, उसी प्रकार ग्रामीण लकडिय़ों से लकडिय़ां मिलाते हुए आपस में नृत्य करते हैं।

पर्व की खुशी में वे सप्ताह भर नृत्य करते हैं। जसोल गांव में 625 वर्ष पहले पालीवाल ब्राह्मणों ने कन्हैयालाल मंदिर का निर्माण करवाया थ, तब से गेर नृत्य प्रारंभ किया गया। इसके बाद से लगातार नृत्य का आयोजन जारी है।

कलाकारों ने पहुंचाया विदेश

जसोल के गेर दल के कलाकार लेबनोल बेरूल, दक्षिण अफ्रिका के ट्यूनिसिया फेस्टिवल, मोराक्को, कजाकिस्तान के अलमाही, इटली के फ्लोरेंस, फ्रांस में नृत्य की प्रस्तुति दे चुके हंै।

40 मीटर कपड़े की आंगी

गेरिए कंधे से पांव तक आंगी पहनावा पहनते हैं जो कुर्ते और चूड़ीदार नुमा रहती है। इसमें 40 मीटर कपड़ा लगता है जिसमें 20 कलियां ( लहरदार घुमाव)होते हैं। करीब 25 से 30 किलो वजनी आंगी के साथ से घुंघुरू बांध कर नृत्य करते हैं। सिर में साफा, कलंगी, मोड़ बांध व कमरबंध, कटार लगाकर ये जब घेरे में नृत्य करते हंै, तब देखने वाले टकटकी नजरों से इन्हें निहारते हैं।

संरक्षण मिले

विदेशों में नृत्य पर लोग खूब सराहते हैं,लेकिन स्थानीय स्तर पर इतना सम्मान नहीं मिलता। सरकार कला को संरक्षण दें। इससे नई पीढ़ी इसे जान सके। कला खत्म नहीं हों।

- केवलचंद माली जसोल, नायक गेर दल

गेर नृत्य बहुत ही प्राचीन कला है। सरकारी संरक्षण के अभाव है। सरकार कला व कलाकारों को प्रोत्साहित करें। सरकारी मंच उपलब्ध करवाकर इसका प्रचार प्रसार करें।

- खीमाराम माली