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किसानों ने राजस्थान पत्रिका के संवाद कार्यक्रम में अपनी समस्याओं को खुलकर मुखर किया। सुझावों दिए और समाधान के तरीके बताए।
धरतीपुत्रों को इस बात का मलाल है कि हर उपज का समर्थन मूल्य लागू नहीं होने से उनकी फसल का मूल्य आज भी व्यापारी तय करता है।
बीज खरीदते वक्त चार सौ रुपए किलो लेते हैं लेकिन बेचते वक्त वह सौ रुपए हो जाता है। किसान मेहनत करता है लेकिन मोल के वक्त उसका मुंह बंद कर दिया जाता है।
राजस्थान पत्रिका और जिला अनार संघ के संयुक्त तत्वावधान में कृषि उपज मण्डी सभागार में शनिवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में जिलेभर से किसान प्रतिनिधि पहुंचे।
अनार संघ के जिलाध्यक्ष रणवीरसिंह भादू ने कहा कि लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफा तय कर फसल का समर्थन मूल्य बने।
जिला मुख्यालय पर मिट्टी और पानी जांच की लैब हो और फसल बीमा के लिए सालभर समय दिया जाए, जब किसान चाहे बीमा करवा लें।
सामान्य किसानों की बात को सुनें
प्रोफेसर पांचाराम चौधरी ने कहा कि कृषि और व्यापार दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, लेकिन सरकारें कृषि व कृषक के साथ भेदभाव करती हैं।
बाड़मेर में कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग यूनिट बननी चाहिए। राजनेता भी पूंजीपति किसान की बजाय सामान्य किसान को तरजीह दें और उसकी बात को सुना जाए।
जीएसटी देश के लिए फायदेमंद है, यह लागू होना चाहिए। किसान राजाराम नागड़दा ने कहा कि कृषि उपज मण्डी में किसान अपनी फसल लेकर आए तो ढेरी लगाई जाए।
व्यापारी अनाज की बोली लगाएं और फिर अनाज बिके, यहां तो व्यापारी खुद ही कहता है फसल का दाम जो वह तय करेगा वही होगा। यह स्थिति ठीक नहीं है।
समय पर मिले बीज
जैसलमेर के नहरी क्षेत्र से आए हरिराम कड़वासरा ने कहा कि कृषि और पशुपालन दोनों पर राज्य सरकारें ध्यान दें। बीज की व्यवस्था किसानों के लिए समय पर की जाए।
बीजों का संरक्षण हो और डेयरी फार्म का विकास किया जाए। आधुनिक किसानी को बढ़ावा दे रहे टीसी जाटोल ने कहा कि औद्योगिक कॉरिडोर के लिए किसानों की जमीन लेना गलत है। किसानी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है
लेकिन बड़े प्रोजेक्ट लगाने में देश की कृषि बर्बाद हो रही है। इस अंतरराष्ट्रीय साजिश पर ध्यान देना होगा।
रतनाराम बिसारणिया ने किसानों का अनुदान सीधा उनके खातों में जमा करवाने की पैरवी की। अनार संघ के सचिव गिरधारीराम ने कहा कि गिरदावरी रिपोर्ट घर बैठे तैयार होती है।
इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। खरथाराम ने कहा कि डार्क जोन को लेकर रिपोर्ट दुरुस्त होनी चाहिए। जहां डार्कजोन बताया जा रहा है वहां पानी खूब है, वहां कृषि के लिए मना कर दिया जाता है।
यह ठीक नहीं है। सताराम बाछड़ाऊ ने कहा कि बैंक और सोसायटी में आम आदमी कतार लगाए रखता है लेकिन खास लोगों के काम तुरंत हो जाते हैं, बिचौलिए हावी हैं। बायतु के करणपाल और महाबार के नगाराम ने भी अपनी बात रखी।
किसानों की साथी है पत्रिका
किसानों ने कहा कि पत्रिका किसानों के साथी की तरह है। खेती किसानी को लेकर पत्रिका में प्रकाशित आलेख उनके लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
हरिराम कड़वासरा ने पत्रिका के आलेखों की चर्चा करते हुए कहा कि किसानों की आवाज बनकर पत्रिका ने सामाजिक सरोकार के जो भी कार्य किए हैं वे सराहनीय हैं।
Published on:
25 Jun 2017 08:45 am
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