
दक्षिण कोरिया में सीएम भजनलाल शर्मा के साथ पेंपो प्रजापत
धोरीमन्ना, बाड़मेर। अंतरराष्ट्रीय भाषा की अनुवादक पेंपो प्रजापत पुत्री भीखाराम भोभरिया निवासी सुभाष नगर धोरीमन्ना दक्षिण कोरिया में कंपनी में कार्यरत है। वहां पेम्पो दक्षिण कोरिया व भारत के बीच में व्यापार के संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच कोरियन एवं भारत के बीच में इंटरनेशनल भाषा परिवर्तन करने को लेकर कार्य कर रही है। दोनों देशों के व्यापारिक कामकाज को लेकर सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दक्षिण कोरिया गए थे। जहां दोनों देशों के बीच व्यवसायिक चर्चा के दौरान पेम्पो ने सीएम से बातचीत की।
पेंपो प्रजापत के पिता सब्जी विक्रेता हैं। पेंपो ने बताया कि उसने आठवीं तक की पढ़ाई गांव के ही विद्यालय से की। बारहवीं उतीर्ण करने के बाद पेंपो का झारखण्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला हुआ, लेकिन यहां तीसरी भाषा के रूप में दक्षिणी कोरिया (कुरियन) भी लेनी थी। हिंदी माध्यम से पढ़ी और घर पर मारवाड़ी बोली बोलने वाली पेंपो के लिए यह एक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे सहजता से स्वीकार कर लिया। पहले ही साल में उसने भाषा सीख ली और अपनी स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
कोरियन के साथ स्नातक पूर्ण करने के बाद पेंपो को आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय जाना था, लेकिन वह बताती हैं कि पिता पर आर्थिक बोझ कम करने और उनकी मदद के लिए उन्होंने नौकरी करने और अपनी पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। इस दौरान उन्होंने चेन्नई की एक कंपनी में कोरियाई भाषा की नौकरी की। इस तरह उनकी रुचि बढ़ती गई। फिर ठान लिया कि अब तो कोरिया जाउंगी।
फिर क्या, विभिन्न माध्यमों से स्कॉलरशिप के लिए प्रयास किए। दो बार इसके लिए परीक्षा दी और वह अब सफल हो गई। कोरिया की ईवाह वूमेन युनिवर्सिटी में चयन हुआ। यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद पेंपो बतौर इंटरनेशनल भाषा ट्रांसलेटर कार्यरत हैं। इस तरह, छोटे से कस्बे से निकलकर पेंपो प्रजापत में दक्षिण कोरिया तक का सफर किया। वह कहती है कि आगे उसको और अच्छे विकल्प मिले, तो वह उन पर भी काम करेगी।
Updated on:
10 Sept 2024 04:58 pm
Published on:
10 Sept 2024 04:56 pm
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